उत्तराखंड की सियासत में ‘प्रभारी’ संग्राम: विधायक लखपत बुटोला ने BJP को दी खुली चुनौती, दुष्यंत गौतम पर साधा निशाना
उत्तराखंड की सियासत में ‘प्रभारी’ संग्राम: विधायक लखपत बुटोला ने BJP को दी खुली चुनौती, दुष्यंत गौतम पर साधा निशाना
देहरादून/बदरीनाथ: उत्तराखंड में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के प्रस्तावित गढ़वाल दौरे को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भाजपा द्वारा कुमारी शैलजा के दौरे पर उठाए जा रहे सवालों का जवाब देते हुए बदरीनाथ से कांग्रेस विधायक लखपत बुटोला ने मोर्चा संभाल लिया है। बुटोला ने न केवल भाजपा पर पलटवार किया, बल्कि पार्टी के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को लेकर एक बड़ी चुनौती भी पेश की है।
लखपत बुटोला की ‘दर्शन’ चुनौती
विधायक लखपत बुटोला ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा नेतृत्व को ललकारते हुए कहा कि यदि भाजपा में साहस है, तो वे अपने प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को सार्वजनिक रूप से बदरीनाथ और केदारनाथ के दर्शन कराकर दिखाएं। बुटोला का दावा है कि दुष्यंत गौतम उत्तराखंड में “खुलेआम नहीं घूम सकते” क्योंकि प्रदेश की जनता उनके प्रति आक्रोशित है।
विवाद की जड़: अंकिता भंडारी केस और ‘मातृशक्ति’ का अपमान
कांग्रेस विधायक ने इस चुनौती के पीछे अंकिता भंडारी हत्याकांड का हवाला दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:
अंकिता भंडारी केस के बाद जिस तरह से उत्तराखंड की महिलाओं और ‘मातृशक्ति’ का अपमान हुआ, उसे प्रदेश की जनता भूली नहीं है।
भाजपा अपने उन नेताओं और प्रभारियों को बचाने में जुटी है जिन पर गंभीर आरोप लगे हैं, जबकि कांग्रेस की प्रभारी एक सम्मानित महिला और दलित वर्ग से आने वाली नेता हैं।
बुटोला ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान उन्हें महिला अधिकारों और अंकिता भंडारी केस पर बोलने का मौका नहीं दिया गया।
कुमारी शैलजा का दौरा और भाजपा का कटाक्ष
6 मई से शुरू हो रहे कुमारी शैलजा के गढ़वाल दौरे को भाजपा ‘चुनावी पिकनिक’ और ‘पर्यटन’ बताकर निशाना साध रही है। भाजपा का तर्क है कि कांग्रेस के नेता केवल दौरों तक सीमित हैं, जबकि कांग्रेस का कहना है कि उनकी प्रभारी संगठन को मजबूत करने और जनता के मुद्दों को उठाने आ रही हैं।
दलित और महिला कार्ड का इस्तेमाल
विधायक बुटोला ने भाजपा पर हमला तेज करते हुए कहा कि कुमारी शैलजा एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद होने के साथ-साथ एक सम्मानित दलित महिला हैं। भाजपा द्वारा उन पर किए जा रहे कटाक्ष को बुटोला ने सीधे तौर पर महिलाओं और दलित वर्ग का अपमान करार दिया है।
सियासी मायने
उत्तराखंड की राजनीति में ‘प्रभारी’ का मुद्दा हमेशा गर्म रहता है। जहां कांग्रेस कुमारी शैलजा के जरिए गढ़वाल की सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, वहीं भाजपा दुष्यंत गौतम के संगठनात्मक कौशल पर भरोसा जता रही है। हालांकि, लखपत बुटोला के इस तीखे प्रहार ने आगामी दिनों में बदरी-केदार घाटी में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने के संकेत दे दिए हैं।
निष्कर्ष: कुमारी शैलजा का 6 मई का दौरा अब केवल एक संगठनात्मक दौरा न रहकर प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है। अब देखना यह है कि भाजपा लखपत बुटोला की इस ‘दर्शन चुनौती’ पर क्या प्रतिक्रिया देती है।
