हेमकुंड साहिब यात्रा 2026: 23 मई को खुलेंगे कपाट, भारतीय सेना ने बर्फ काटकर बनाया रास्ता
हेमकुंड साहिब यात्रा 2026: 23 मई को खुलेंगे कपाट, भारतीय सेना ने बर्फ काटकर बनाया रास्ता
चमोली (उत्तराखंड): सिखों के पवित्र धाम हेमकुंड साहिब और हिंदू आस्था के केंद्र लक्ष्मण लोकपाल मंदिर की यात्रा का इंतजार कर रहे श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खबर है। आगामी 23 मई 2026 को दोनों धामों के कपाट आधिकारिक तौर पर खोल दिए जाएंगे। यात्रा के आगाज के लिए पहला जत्था 20 मई को ऋषिकेश से रवाना होगा।
सेना और सेवादारों ने संभाला मोर्चा
कपाट खुलने से पहले की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए भारतीय सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी (9 माउंटेन ब्रिगेड) और गुरुद्वारा ट्रस्ट के सेवादार हेमकुंड साहिब कॉम्प्लेक्स तक पहुंच गए हैं।
अहम बदलाव: संयुक्त टीम ने अरदास के बाद गुरुद्वारा कॉम्प्लेक्स के द्वार खोल दिए हैं। अब टीम यहीं रुककर कार्य करेगी, जिससे पहले की तरह उन्हें हर शाम वापस घांघरिया नहीं लौटना पड़ेगा।
ट्रैक का सुदृढ़ीकरण: अब सेना की टीम अटलकोटी ग्लेशियर पॉइंट से नीचे की ओर बर्फ हटाकर रास्ते को चौड़ा करने का काम करेगी, ताकि तीर्थयात्रियों की आवाजाही सुरक्षित हो सके।
कठिन परिस्थितियों में ‘निशुल्क’ सेवा
समुद्र तल से लगभग 15,200 फीट (4,632 मीटर) की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब दुनिया के सबसे कठिन तीर्थस्थलों में से एक है। भारतीय सेना दशकों से यहां शून्य से नीचे के तापमान और ग्लेशियरों के बीच निस्वार्थ भाव से रास्ता बनाने का कार्य कर रही है। गुरुद्वारा प्रबंधन ट्रस्ट ने सेना के इस अभूतपूर्व योगदान के लिए आभार व्यक्त किया है।
यात्रा से जुड़ी मुख्य जानकारी:
कपाट खुलने की तिथि: शनिवार, 23 मई 2026।
प्रथम जत्था रवानगी: 20 मई 2026 (ऋषिकेश से)।
स्थान: चमोली जनपद, गढ़वाल हिमालय।
ट्रस्ट की अपील: श्रद्धालुओं से अनुरोध किया गया है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और ऊँचाई पर होने वाली ऑक्सीजन की कमी व ठंड के मद्देनजर पूरी तैयारी के साथ आएं।
महत्व: बर्फ से ढकी सात चोटियों के बीच स्थित यह पवित्र झील और गुरुद्वारा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सेना और आम नागरिकों के बीच समन्वय की एक अनूठी मिसाल भी पेश करता है।
