उत्तराखंड

चारधाम यात्रा में ‘छोटू’ बना बड़ा सहारा: गैस संकट के बीच 5 किलो के सिलेंडर ने बचाई व्यापारियों की लाज

चारधाम यात्रा में ‘छोटू’ बना बड़ा सहारा: गैस संकट के बीच 5 किलो के सिलेंडर ने बचाई व्यापारियों की लाज

​देहरादून: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इस साल न केवल श्रद्धालुओं की भारी भीड़, बल्कि एक अप्रत्याशित ‘गैस संकट’ के कारण भी चर्चा में रही। अंतरराष्ट्रीय तनाव और आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच, इंडियन ऑयल का 5 किलो वाला ‘छोटू’ सिलेंडर यात्रा मार्ग पर छोटे व्यापारियों और ढाबा संचालकों के लिए ‘संकटमोचक’ बनकर उभरा है।

​वैश्विक तनाव और चारधाम पर असर

​ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हुई। इसका सीधा असर भारत के व्यावसायिक गैस सिलेंडरों (19kg) पर पड़ा। उत्तराखंड में स्थिति तब गंभीर हो गई जब चारधाम यात्रा अपने चरम पर थी और होटलों व ढाबों के लिए व्यावसायिक सिलेंडरों की सप्लाई 70-75% तक सीमित कर दी गई।

​’छोटू’ सिलेंडर: संकट में बड़ी राहत

​बड़े सिलेंडरों की किल्लत के बीच 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर ने मोर्चा संभाला। आंकड़ों के अनुसार:

​वितरण: अब तक यात्रा मार्ग पर करीब 18,000 छोटू सिलेंडर वितरित किए जा चुके हैं।

​प्राथमिकता: राज्य की कुल सप्लाई का 70% हिस्सा केवल चारधाम रूट (गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) पर भेजा जा रहा है।

​उपयोगिता: पहाड़ी रास्तों पर हल्का होने के कारण इसका परिवहन आसान है, जिससे चाय की दुकानों और छोटे स्टालों को काफी मदद मिली।

​सरकार और IOCL की सक्रियता

​गैस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खुद केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री से मुलाकात कर आपूर्ति बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL) ने सप्लाई मैनेजमेंट में सुधार किया। अधिकारियों का कहना है कि वे पंजीकृत उपभोक्ताओं को शत-प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल ‘छोटू’ ने व्यवस्था को पटरी से उतरने से बचा लिया है।

​भविष्य का संकेत: वैकल्पिक ऊर्जा की जरूरत

​इस संकट ने पहाड़ी क्षेत्रों में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में सौर ऊर्जा और बायोगैस जैसे विकल्पों पर ध्यान देना होगा ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर हमारी धार्मिक यात्राओं पर न पड़े।

​निष्कर्ष: 19 अप्रैल से शुरू हुई इस यात्रा में अब तक 6.5 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। जहां बड़े-बड़े संसाधन कम पड़ गए, वहां इस छोटे सिलेंडर ने यह साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया छोटा सा विकल्प भी एक बड़ी आपदा को टाल सकता है।

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