राहुल गांधी मानहानि मामला: कोर्ट ने वॉइस सैंपल की अर्जी की खारिज
सुल्तानपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लिए राहत भरी खबर आई है। कोर्ट ने अमित शाह पर विवादित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी के वॉइस सैंपल (आवाज के नमूने) की जांच की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
राहुल गांधी मानहानि मामला: कोर्ट ने वॉइस सैंपल की अर्जी की खारिज
अदालत का फैसला और मुख्य टिप्पणी
मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा ने भाजपा नेता विजय मिश्र द्वारा दायर अर्जी को खारिज करते हुए एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा:
”चूंकि राहुल गांधी ने कोर्ट में पेश की गई सीडी में मौजूद आवाज को अपनी होने से इनकार नहीं किया है, इसलिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) से आवाज के मिलान की कोई आवश्यकता नहीं प्रतीत होती।”
मामले की पृष्ठभूमि
विवाद का कारण: यह मामला साल 2018 का है, जब कर्नाटक चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
शिकायतकर्ता: इस टिप्पणी से आहत होकर भाजपा नेता विजय मिश्र ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था।
कार्यवाही: 20 फरवरी 2024 को राहुल गांधी ने कोर्ट में हाजिर होकर जमानत ली थी और फरवरी 2026 में उनका बयान दर्ज किया गया था।
वॉइस सैंपल विवाद क्या था?
परिवादी के वकील संतोष पांडेय ने 12 मार्च को कोर्ट में अर्जी दी थी कि राहुल गांधी की आवाज का नमूना लेकर सीडी में मौजूद आवाज से मिलान कराया जाए। राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ल ने इसका कड़ा विरोध किया था। लंबी बहस के बाद कोर्ट ने आज अपना फैसला सुनाते हुए इस मांग को अनुचित ठहराया।
अगली तारीख और कानूनी कदम
अगली सुनवाई: कोर्ट ने अब 11 मई 2026 की तारीख बहस के लिए तय की है। उसी दिन धारा 437-ए के अनुपालन और जमानत नामा दाखिल करने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।
रिवीजन की तैयारी: परिवादी पक्ष के वकीलों का कहना है कि वे इस आदेश का अध्ययन करने के बाद ऊपरी अदालत (सेशन कोर्ट) में रिवीजन याचिका दाखिल करेंगे।
इस फैसले के साथ ही फिलहाल राहुल गांधी को इस तकनीकी जांच से राहत मिल गई है, हालांकि मानहानि का मुख्य मामला अभी भी विचाराधीन है।
