Thursday, September 10, 2026
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उत्तराखंड

धधक रहे हैं पहाड़: गढ़वाल में वनाग्नि ने तोड़ा पिछले वर्षों का रिकॉर्ड, ब्लैक कार्बन बढ़ा रहा ग्लेशियरों पर खतरा

धधक रहे हैं पहाड़: गढ़वाल में वनाग्नि ने तोड़ा पिछले वर्षों का रिकॉर्ड, ब्लैक कार्बन बढ़ा रहा ग्लेशियरों पर खतरा

​उत्तराखंड के जंगलों के लिए इस साल की गर्मी काल बनकर आई है। गढ़वाल मंडल के वनों में आग (वनाग्नि) ने इस बार समय से पहले ही भयावह रूप धारण कर लिया है। वन विभाग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल के तीसरे सप्ताह तक ही आग की घटनाओं ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 145 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिससे करीब 96.08 हेक्टेयर बेशकीमती जंगल जलकर खाक हो चुका है।

​बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग बने ‘हॉटस्पॉट’

​गढ़वाल क्षेत्र वर्तमान में वनाग्नि का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। वन विभाग के अनुसार, बदरीनाथ वन प्रभाग सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ 41 घटनाओं में 65 हेक्टेयर जंगल जल चुका है। वहीं रुद्रप्रयाग में भी 30 से अधिक घटनाएं सामने आई हैं।

​वनाग्नि के कारण न केवल हरियाली नष्ट हो रही है, बल्कि वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास भी जल रहे हैं। जान बचाने के लिए वन्यजीव अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ गया है।

​ब्लैक कार्बन और बिगड़ती हवा: सेहत पर भारी

​वनाग्नि का असर अब केवल पेड़ों तक सीमित नहीं है। जंगलों से उठने वाला धुआं और ब्लैक कार्बन वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हवा में घुलता ब्लैक कार्बन न केवल स्थानीय तापमान बढ़ा रहा है, बल्कि हिमालयी ग्लेशियरों पर जम कर उनके पिघलने की गति को भी तेज कर सकता है। इससे पहाड़ी क्षेत्रों में सांस की बीमारियों का ग्राफ बढ़ने लगा है।

​29 अप्रैल तक के प्रमुख आंकड़े:

​कुल घटनाएं: 145 (पिछले वर्ष से 40% अधिक नुकसान)

​आरक्षित वन क्षेत्र: 81 घटनाएं

​सिविल वन क्षेत्र: 64 घटनाएं

​प्रभावित क्षेत्रफल: 96.08 हेक्टेयर

​सर्वाधिक प्रभावित: बदरीनाथ और रुद्रप्रयाग वन प्रभाग

​बारिश से मिली ‘संजीवनी’, विभाग अब भी अलर्ट पर

​पिछले 24 घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में हुई बारिश ने धधकते जंगलों के लिए ‘संजीवनी’ का काम किया है। बारिश के कारण आग के फैलाव पर फिलहाल रोक लगी है और तापमान में भी गिरावट आई है। हालांकि, वन विभाग इसे स्थायी राहत नहीं मान रहा है।

​सीसीएफ (वनाग्नि) सुशांत पटनायक का कहना है कि, “तापमान में वृद्धि और लंबे शुष्क स्पेल के कारण इस बार चुनौतियां बढ़ी हैं। हमने बड़ी घटनाओं को रिकॉर्ड समय में नियंत्रित किया है। बारिश से राहत मिली है, लेकिन हमारी टीमें अभी भी अलर्ट मोड पर हैं। हम स्थानीय लोगों से भी अपील करते हैं कि वे वनों को बचाने में विभाग का सहयोग करें।”

​मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर होने वाली बारिश आग पर पूर्ण नियंत्रण पाने में सहायक हो सकती है, लेकिन शुष्क मौसम लौटते ही खतरा फिर से मंडरा सकता है।

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