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कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता साफ: जून से अगस्त तक चलेगा तीर्थयात्रा का दौर, 19 मई तक करें आवेदन

कैलाश मानसरोवर यात्रा का रास्ता साफ: जून से अगस्त तक चलेगा तीर्थयात्रा का दौर, 19 मई तक करें आवेदन

​श्रद्धालुओं के लिए एक बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय ने इस वर्ष की कैलाश मानसरोवर यात्रा की घोषणा कर दी है। मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार, यह पवित्र यात्रा इस साल जून से शुरू होकर अगस्त तक चलेगी। भगवान शिव के निवास स्थान माने जाने वाले कैलाश पर्वत के दर्शन के लिए जाने के इच्छुक तीर्थयात्री 19 मई 2026 तक अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।

​दो ऐतिहासिक मार्गों से होगी यात्रा

​इस वर्ष की यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय ने दो प्रमुख रास्तों को हरी झंडी दी है। श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार निम्नलिखित मार्गों का चुनाव कर सकते हैं:

​लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड): यह पारंपरिक मार्ग उत्तराखंड की पहाड़ियों से होकर गुजरता है। इस मार्ग से 50-50 यात्रियों के कुल 10 जत्थे रवाना किए जाएंगे।

​नाथू ला दर्रा (सिक्किम): सिक्किम के जरिए जाने वाला यह मार्ग आधुनिक सुविधाओं से लैस है। इस रास्ते से भी 50 यात्रियों के 10 अलग-अलग जत्थे अपनी यात्रा पूरी करेंगे।

​चीनी सरकार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विदेश मंत्रालय ने कुल 100 तीर्थयात्रियों के जत्थों की व्यवस्था की है, ताकि सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा जा सके।

​पंजीकरण की प्रक्रिया और चयन पद्धति

​विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यात्रा के लिए आवेदन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। इच्छुक आवेदक आधिकारिक वेबसाइट kmy.gov.in पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं।

​मंत्रालय के अनुसार, आवेदकों का चयन पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी होगा। इसके लिए एक कंप्यूटर-जनित रैंडम सिलेक्शन (लॉटरी सिस्टम) प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जिसमें लिंग-संतुलन का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। आवेदकों को अब जानकारी के लिए पत्र या फैक्स भेजने की जरूरत नहीं है; वेबसाइट पर ही फीडबैक और सुझावों के लिए विकल्प दिए गए हैं।

​5 साल के लंबे इंतजार के बाद बढ़ी रौनक

​कैलाश मानसरोवर यात्रा का धार्मिक महत्व हिंदू, जैन और बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए सर्वोपरि है। ज्ञात हो कि कोविड-19 महामारी और पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैन्य गतिरोध के कारण इस यात्रा पर लंबे समय तक ग्रहण लगा रहा। साल 2020 में इसे पहली बार स्थगित किया गया था। भारत और चीन के बीच कूटनीतिक संबंधों में सुधार के प्रयासों के बाद पिछले साल यह यात्रा पुनः शुरू हुई और इस साल इसे और भी व्यवस्थित ढंग से आयोजित किया जा रहा है।

​तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और पवित्र मानसरोवर झील की यात्रा को आध्यात्मिक रूप से दुनिया की सबसे कठिन लेकिन फलदायी यात्राओं में से एक माना जाता है। सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे समय रहते अपना आवेदन पूरा करें और वेबसाइट पर दी गई स्वास्थ्य नियमावलियों का पालन करें।

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