1 मई को खुलेंगे लाटू देवता मंदिर के कपाट, पहली बार दो दिवसीय मेले का होगा आयोजन
1 मई को खुलेंगे लाटू देवता मंदिर के कपाट, पहली बार दो दिवसीय मेले का होगा आयोजन
चमोली (देवाल): उत्तराखंड की लोक संस्कृति और आस्था के प्रतीक प्रसिद्ध लाटू देवता मंदिर के कपाट आगामी 1 मई (वैशाख पूर्णिमा) को दोपहर 1 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। इस वर्ष मंदिर के कपाट खुलने के अवसर को और भी भव्य बनाने के लिए पहली बार दो दिवसीय सांस्कृतिक मेले की तैयारी की जा रही है।
प्रमुख आकर्षण: दो दिवसीय भव्य मेला और सांस्कृतिक संध्या
मेला कमेटी के अध्यक्ष कृष्णा बिष्ट ने बताया कि इस वर्ष 1 और 2 मई को ‘लाटू देवता जागृतिक पर्यटन सांस्कृतिक महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में देवभूमि के प्रसिद्ध गायक अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे:
मुख्य कलाकार: सौरभ मैठाणी, विवेक नौटियाल, वीरू जोशी, कुंदन बिष्ट, मोनिका, देवराज आगरी और कुंवर नेगी।
ऐतिहासिक फैसला: पशु बलि पर पूर्ण प्रतिबंध
इस वर्ष लाटू देवता मंदिर समिति और वांण गांव के ग्रामीणों ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मंदिर परिसर में सदियों से चली आ रही पशु बलि प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।
अब श्रद्धालु मनौती पूरी होने पर केवल सात्विक पूजा-अर्चना करेंगे। ग्रामीणों ने इसे धार्मिक परंपराओं में एक सकारात्मक बदलाव बताया है।
अनोखी मान्यता: आंखों पर पट्टी बांधकर होती है पूजा
लाटू देवता मंदिर अपनी विशिष्ट और रहस्यमयी मान्यताओं के लिए विश्व प्रसिद्ध है:
पुजारी के लिए नियम: मंदिर के गर्भगृह में पूजा करते समय पुजारी अपनी आंखों और मुंह पर पट्टी बांधते हैं। माना जाता है कि देवता के साक्षात रूप को देखना मानवीय दृष्टि के लिए संभव नहीं है।
भक्तों के लिए दूरी: आम भक्त मंदिर की मुख्य परिधि से 50 मीटर दूर रहकर ही दर्शन और प्रार्थना करते हैं।
रहस्यमय स्वरूप: आज तक कोई नहीं जानता कि गर्भगृह के भीतर लाटू देवता किस रूप में विराजमान हैं। जनश्रुति है कि नियमों का उल्लंघन कर अंदर जाने वाला व्यक्ति अपनी सुध-बुध खो सकता है।
मां नंदा के ‘धर्म भाई’ हैं लाटू देवता
धार्मिक इतिहास के अनुसार, लाटू देवता को माता नंदा राजराजेश्वरी का धर्म भाई माना जाता है।
नंदा राजजात यात्रा: प्रत्येक 12 वर्ष में होने वाली प्रसिद्ध नंदा राजजात यात्रा में लाटू देवता वांण गांव से आगे के निर्जन पड़ावों तक माता की अगुवाई करते हैं।
लोकजात यात्रा: प्रतिवर्ष होने वाली नंदा लोकजात में भी देवता का ‘निशान’ वैदनी कुंड तक मां नंदा के आगे-आगे चलता है।
नोट: मंदिर के कपाट आम भक्तों के दर्शन के लिए 6 माह तक खुले रहेंगे, जबकि गर्भगृह को कपाट खुलने के कुछ घंटों बाद ही विशिष्ट पूजा के उपरांत बंद कर दिया जाएगा।
