Amebedkar Jayanti: अंबेडकर जयंती पर जानें बाबा साहब से जुड़ी 10 अनसुनी और प्रेरक बातें
डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें हम आधुनिक भारत के शिल्पकार के रूप में जानते हैं, उनका जीवन संघर्ष और उपलब्धियों की एक ऐसी गाथा है जिसे चंद पन्नों में समेटना नामुमकिन है। आज उनकी जयंती के अवसर पर, आइए जानते हैं बाबा साहेब से जुड़ी 10 ऐसी अनसुनी बातें, जो बहुत कम लोग जानते हैं:
डॉ. बी.आर. अंबेडकर: 10 अनसुनी और प्रेरक बातें
1. विदेश से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट करने वाले पहले भारतीय
डॉ. अंबेडकर न केवल कानून के विशेषज्ञ थे, बल्कि वे दक्षिण एशिया के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री हासिल की थी।
2. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नींव
शायद कम ही लोग जानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना डॉ. अंबेडकर के विचारों और उनकी किताब ‘The Problem of the Rupee – Its Origin and Its Solution’ में दिए गए दिशा-निर्देशों के आधार पर की गई थी।
3. तिरंगे में ‘अशोक चक्र’ को स्थान
भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के बीच में ‘अशोक चक्र’ (धम्म चक्र) को स्थान दिलाने का मुख्य श्रेय डॉ. अंबेडकर को जाता है। उन्होंने ही चरखे की जगह चक्र लगाने का सुझाव दिया था, जो गतिशीलता और न्याय का प्रतीक है।
4. काम के घंटों में ऐतिहासिक बदलाव
आज जो हम दफ्तरों में 8 घंटे काम करते हैं, वह डॉ. अंबेडकर की ही देन है। 1942 में श्रम मंत्री के रूप में उन्होंने काम के घंटों को 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे करवाया था।
5. जल और बिजली नीति के जनक
डॉ. अंबेडकर ने भारत में जल प्रबंधन और बिजली उत्पादन के लिए ‘दामोदर घाटी परियोजना’ और ‘हीराकुंड बांध’ जैसी बड़ी परियोजनाओं की रूपरेखा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
6. अर्थशास्त्र में नोबेल विजेता भी मानते हैं उन्हें गुरु
नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने डॉ. अंबेडकर को ‘अर्थशास्त्र में अपना पितामह’ (Father in Economics) माना है। सेन के अनुसार, अंबेडकर का आर्थिक दृष्टिकोण अपने समय से बहुत आगे था।
7. दो बार किया गया अंतिम संस्कार?
बहुत कम लोग जानते हैं कि 1956 में उनके निधन के बाद, उनका अंतिम संस्कार बौद्ध रीति-रिवाज से किया गया था। वह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा ‘स्वैच्छिक’ अंतिम संस्कार था, जिसमें लगभग 5 लाख अनुयायी शामिल हुए थे।
8. महिलाओं के अधिकारों के लिए इस्तीफा
महिलाओं को संपत्ति में अधिकार और समान दर्जा दिलाने के लिए वे ‘हिंदू कोड बिल’ लाए थे। जब संसद में इस बिल को पारित करने में देरी हुई, तो उन्होंने कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था।
9. कोलंबिया यूनिवर्सिटी की ‘विश्व के शीर्ष विद्वान’ सूची
2004 में कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने दुनिया के 100 सबसे प्रतिभाशाली छात्रों की सूची जारी की थी, जिसमें बाबा साहेब को प्रथम स्थान पर रखा गया था। उन्हें ‘Symbol of Knowledge’ (ज्ञान का प्रतीक) कहा गया।
10. सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी
डॉ. अंबेडकर को किताबों से बेहद प्रेम था। उनकी निजी लाइब्रेरी, जिसे ‘राजगृह’ कहा जाता था, में 50,000 से अधिक किताबें थीं। माना जाता है कि वह उस समय दुनिया की सबसे बड़ी व्यक्तिगत लाइब्रेरी थी।
”शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पियेगा वह दहाड़ेगा।” — डॉ. बी.आर. अंबेडकर
बाबा साहेब के ये अनसुने पहलू हमें बताते हैं कि वे केवल एक समुदाय के नेता नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण की सबसे मजबूत कड़ी थे।
