संसद में सियासी सौहार्द: अंबेडकर जयंती पर पीएम मोदी और खड़गे के बीच दिखी ‘केमिस्ट्री’, लगे ठहाके
संसद में सियासी सौहार्द: अंबेडकर जयंती पर पीएम मोदी और खड़गे के बीच दिखी ‘केमिस्ट्री’, लगे ठहाके
भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर आज संसद परिसर के ‘प्रेरणा स्थल’ पर राजनीति की एक अलग और सुखद तस्वीर देखने को मिली। तीखे राजनीतिक हमलों और वैचारिक मतभेदों के बीच, देश के दो बड़े दिग्गजों—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे—ने न केवल मंच साझा किया, बल्कि एक-दूसरे के साथ गर्मजोशी से मुलाकात भी की।
मुस्कुराहट और ठहाकों के बीच श्रद्धांजलि
संविधान निर्माता बाबा साहेब को श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे पीएम मोदी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच कुछ क्षणों तक अनौपचारिक बातचीत हुई, जिसने वहां मौजूद अन्य नेताओं और जनता का ध्यान अपनी ओर खींचा। दोनों नेताओं को मुस्कुराते और ठहाके लगाते हुए देखा गया, जो लोकतंत्र में स्वस्थ संवाद की एक महत्वपूर्ण मिसाल पेश करता है।
प्रमुख हस्तियों ने दी श्रद्धांजलि
संसद परिसर में आयोजित इस औपचारिक कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे
अन्य सांसद और विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेता।
जनता के लिए खुला ‘प्रेरणा स्थल’
अंबेडकर जयंती के विशेष अवसर पर ‘प्रेरणा स्थल’ को आम लोगों के लिए भी खोला गया था। हजारों की संख्या में पहुंचे लोगों ने बाबा साहेब को याद किया और इस दौरान देश के शीर्ष नेताओं को इस तरह सहज भाव में मिलते देख सराहना की।
संसद में संवाद का दौर: राहुल गांधी से भी हुई थी चर्चा
सियासी सौहार्द की यह तस्वीर केवल आज तक सीमित नहीं रही। इससे पहले 11 अप्रैल को महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के मौके पर भी ऐसी ही झलक देखने को मिली थी। उस दौरान:
प्रधानमंत्री मोदी और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी के बीच काफी लंबी बातचीत हुई थी।
वीडियो फुटेज में पीएम मोदी को राहुल गांधी से गहन चर्चा करते देखा गया था, जिसे राहुल गांधी गौर से सुन रहे थे।
निष्कर्ष
लोकसभा चुनाव और संसद के सत्रों के दौरान अक्सर पक्ष-विपक्ष के बीच कड़वाहट देखने को मिलती है, लेकिन ज्योतिबा फुले और बाबा साहेब अंबेडकर जैसी महान विभूतियों की जयंती पर नेताओं का यह मिलन संकेत देता है कि राष्ट्रहित और महापुरुषों के सम्मान के मुद्दे पर भारतीय राजनीति आज भी एकजुट है।
