इजरायल-ईरान तनाव: पीएम नेतन्याहू की बड़ी चेतावनी, कहा- ‘ईरान के साथ सीजफायर जल्द हो सकता है खत्म’
इजरायल-ईरान तनाव: पीएम नेतन्याहू की बड़ी चेतावनी, कहा- ‘ईरान के साथ सीजफायर जल्द हो सकता है खत्म’
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक कड़ा और चेतावनी भरा बयान दिया है। नेतन्याहू ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ मौजूदा संघर्ष विराम (Ceasefire) अधिक समय तक टिकने वाला नहीं है और यह जल्द ही समाप्त हो सकता है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायल की सैन्य कार्रवाई ने ईरान के परमाणु केंद्रों को तबाही का केंद्र बनने से रोका है।
परमाणु केंद्रों की तुलना ‘यातना शिविरों’ से की
पीएम नेतन्याहू ने अपने संबोधन में एक भावुक और ऐतिहासिक संदर्भ का उपयोग करते हुए कहा कि अगर इजरायल ने समय रहते सैन्य कार्रवाई न की होती, तो ईरान के नतांज, फोर्डो और बुशहर जैसे परमाणु ठिकानों को भविष्य में ऑशविट्ज, माजदा नेक और सोबिबोर जैसे कुख्यात नाजी यातना केंद्रों की तरह याद किया जाता।
क्या थे ऑशविट्ज और सोबिबोर?
ये द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी द्वारा पोलैंड में स्थापित किए गए मृत्यु शिविर थे, जहां लाखों यहूदियों की गैस चैंबरों और श्रम के जरिए हत्या की गई थी। नेतन्याहू का यह बयान ईरान के परमाणु खतरे को अस्तित्व की लड़ाई के रूप में पेश करने की कोशिश है।
ट्रंप के रुख का समर्थन और जेडी वेंस से वार्ता
इजरायल के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के नए प्रशासन के साथ मजबूत तालमेल का दावा किया है। उन्होंने बताया कि उनकी अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से फोन पर विस्तार से चर्चा हुई है।
ईरान की घेराबंदी: नेतन्याहू ने कहा कि ईरान द्वारा नियमों के उल्लंघन के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने जो ‘नावल नाकेबंदी’ (Naval Blockade) और आर्थिक घेराबंदी का फैसला लिया है, इजरायल उसका पूरी तरह समर्थन करता है।
मुख्य एजेंडा: वेंस के हवाले से नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान से सभी संवर्धित सामग्री (Enriched Material) को हटाना है ताकि आने वाले दशकों तक ईरान परमाणु हथियार बनाने की स्थिति में न रहे।
ईरान का रुख: ‘शर्तों के साथ वार्ता को तैयार’
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच ईरान ने बातचीत के रास्ते खुले रखने की बात कही है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने बयान जारी कर कहा:
ईरान, अमेरिका के साथ शांति वार्ता के एक और दौर के लिए तैयार है, बशर्ते अमेरिका अपनी ‘गैर-कानूनी’ मांगे छोड़ दे और तेहरान की शर्तों का सम्मान करे।
यह बयान हाल ही में इस्लामाबाद में हुई ईरान-अमेरिका वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद आया है।
राजदूत ने पश्चिम एशिया संकट पर जोर देते हुए कहा कि इस क्षेत्र में ईरान और भारत का भविष्य परस्पर जुड़ा हुआ है।
निष्कर्ष
नेतन्याहू का यह बयान स्पष्ट करता है कि इजरायल वर्तमान शांति को अस्थायी मान रहा है और वह ईरान की परमाणु क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में है। दूसरी ओर, ईरान कूटनीति के जरिए प्रतिबंधों से राहत चाहता है, लेकिन अमेरिका और इजरायल के सख्त रुख ने क्षेत्र में युद्ध की आहट को फिर से तेज कर दिया है।
