राजनीति

​संसद में ‘शिष्टाचार’ की तस्वीर: ज्योतिबा फुले की जयंती पर मिले पीएम मोदी और राहुल गांधी, करीब डेढ़ मिनट तक हुई लंबी गुफ्तगू

संसद के गलियारों से आई यह दुर्लभ तस्वीर आज सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहाँ इस मुलाकात पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

​संसद में ‘शिष्टाचार’ की तस्वीर: ज्योतिबा फुले की जयंती पर मिले पीएम मोदी और राहुल गांधी, करीब डेढ़ मिनट तक हुई लंबी गुफ्तगू

​नई दिल्ली: राजनीति के मैदान में धुर विरोधी माने जाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच आज संसद भवन के अंदर एक ऐसी मुलाकात हुई, जिसने सबको हैरान कर दिया। महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं ने न केवल एक-दूसरे का अभिवादन किया, बल्कि करीब 1 मिनट 34 सेकंड तक गहन चर्चा भी की।

​कैसे शुरू हुई बातचीत?

​संसद परिसर में ज्योतिबा फुले को श्रद्धांजलि देने के लिए राहुल गांधी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के साथ कतार में खड़े थे।

​सम्मान और अभिवादन: जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गाड़ी से उतरे, उन्होंने हाथ जोड़कर सभी सांसदों का अभिवादन किया। इस कतार में मौजूद राहुल गांधी ने भी हाथ जोड़कर पीएम का सम्मानपूर्वक स्वागत किया।

​विशेष मुलाकात: बाकी सांसदों से हाथ मिलाने के बाद पीएम मोदी विशेष रूप से पीछे मुड़कर राहुल गांधी के पास आए। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ।

​वीडियो में क्या दिखा?

​सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी काफी सहज नजर आ रहे हैं।

​गहन चर्चा: पीएम मोदी राहुल गांधी से लगातार कुछ कहते हुए दिखाई दिए।

​राहुल का रिस्पॉन्स: बातचीत के दौरान राहुल गांधी भी बड़े ध्यान से पीएम की बातें सुन रहे थे और लगातार सिर हिलाकर अपनी सहमति या प्रतिक्रिया दे रहे थे।

​बॉडी लैंग्वेज: दोनों नेताओं के बीच की तल्खी इस वीडियो में कहीं नजर नहीं आई। इसके उलट, दोनों के बीच एक गरिमामय संवाद देखने को मिला।

​हैरान क्यों हैं लोग?

​यह मुलाकात इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल के वर्षों में संसद के अंदर ऐसे मौके बहुत ही कम आए हैं जब पीएम मोदी और राहुल गांधी इस तरह फुर्सत में गुफ्तगू करते दिखे हों। राजनीतिक रैलियों और सदन के भीतर एक-दूसरे पर कड़े प्रहार करने वाले इन दोनों दिग्गज नेताओं की इस ‘कैमिस्ट्री’ ने यह संदेश दिया है कि वैचारिक मतभेदों के बावजूद लोकतंत्र में शिष्टाचार की जगह हमेशा बनी रहती है।

​सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

​जैसे ही यह वीडियो सामने आया, लोग इसे ‘लोकतंत्र की खूबसूरत तस्वीर’ बताने लगे। कई यूजर्स का कहना है कि चुनावी सरगर्मियों के बीच ऐसी तस्वीरें जनता को यह याद दिलाती हैं कि राजनीति से ऊपर भी एक व्यक्तिगत और प्रोटोकॉल आधारित रिश्ता होता है।

​निष्कर्ष: ज्योतिबा फुले की जयंती पर हुई यह संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण बातचीत आने वाले दिनों में सियासी चर्चाओं का केंद्र बनी रहेगी। फिलहाल, लोगों की उत्सुकता इस बात पर है कि आखिर उस डेढ़ मिनट के दौरान दोनों नेताओं के बीच क्या बात हुई?

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