उत्तराखंड

कौसानी ‘भूत मंदिर’ विवाद: जांच रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग सख्त; पशु बलि पर रोक और स्कूल में लगेगी फेंसिंग

कौसानी ‘भूत मंदिर’ विवाद: जांच रिपोर्ट के बाद शिक्षा विभाग सख्त; पशु बलि पर रोक और स्कूल में लगेगी फेंसिंग

​बागेश्वर जिले के कौसानी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में पिछले कई दिनों से चल रहा ‘भूत मंदिर’ और अंधविश्वास का विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। शिक्षा विभाग की जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने स्कूल परिसर के भीतर और आसपास की अवांछनीय गतिविधियों को पूरी तरह बंद करने का फैसला लिया है।

​क्या था पूरा मामला?

​कौसानी के राजकीय इंटर कॉलेज के समीप कथित तौर पर एक मंदिर का निर्माण किया गया था, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘भूत मंदिर’ के नाम से प्रचारित किया जा रहा था। इस स्थान पर पशु बलि की घटनाएं सामने आने के बाद इलाके में दहशत और अंधविश्वास फैल गया। इसका सबसे बुरा असर स्कूल की छात्राओं पर पड़ा, जिनमें से कई अचानक बीमार पड़ने लगीं और मानसिक रूप से डर के साये में आ गईं।

​खंड शिक्षा अधिकारी की जांच में हुए अहम खुलासे

​मुख्य शिक्षा अधिकारी विनय कुमार आर्य के निर्देश पर खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कमलेश्वरी मेहता ने स्थलीय निरीक्षण और ग्रामीणों से पूछताछ के बाद जांच पूरी की। जांच के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

​सामुदायिक सहयोग से निर्माण: मंदिर का निर्माण शिक्षकों और अभिभावकों की सहमति से हुआ था। ग्रामीणों ने बच्चों के मन से डर भगाने के उद्देश्य से लगभग ₹26,000 की राशि जुटाई थी।

​धन का विवरण: कुल राशि में से करीब ₹3,500 साफ-सफाई पर खर्च हुए और ₹3,500 मंदिर निर्माण के लिए रखे गए। शेष ₹20,000 की राशि अभी भी पीटीए (PTA) फंड में सुरक्षित है।

​पशु बलि की पुष्टि: जांच में यह कड़वा सच सामने आया कि स्कूल के समीप बाहरी तत्वों द्वारा पशु बलि दी जा रही थी, जिससे शैक्षणिक वातावरण दूषित हो रहा था।

​शिक्षा विभाग के कड़े कदम: अब क्या होगा?

​जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है:

​पूजा और बलि पर प्रतिबंध: विभाग स्थानीय लोगों को समझाएगा कि स्कूल परिसर में किसी भी तरह का पूजा-पाठ या बलि स्वीकार्य नहीं है। बात न बनने पर पुलिस और प्रशासन के जरिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​किलेबंदी और सुरक्षा: बाहरी तत्वों के प्रवेश को रोकने के लिए स्कूल की बाउंड्री वॉल पर कंटीली फेंसिंग की जाएगी और पूरे परिसर को CCTV कैमरों की निगरानी में रखा जाएगा।

​काउंसलिंग और मेडिकल रूम: छात्राओं के मन से अंधविश्वास निकालने के लिए स्कूल में एक समर्पित काउंसलिंग कक्ष बनाया गया है। बीमार होने वाली छात्राओं को वहीं प्राथमिक उपचार और विशेषज्ञों की सलाह दी जाएगी।

​अंधविश्वास के खिलाफ जंग

​शिक्षा विभाग का स्पष्ट मानना है कि विद्यालय केवल शिक्षा का मंदिर है। किसी भी तरह की अफवाह या भूत-प्रेत जैसी बातों को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया जाएगा। विभाग की कोशिश है कि कौसानी का यह प्रतिष्ठित स्कूल अपनी पढ़ाई के लिए पहचाना जाए, न कि किसी विवाद के लिए।

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