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चीन से अलग होकर नया देश बनेगा ईस्ट तुर्किस्तान? फिर से उठी आजादी की मांग

चीन से अलग होकर नया देश बनेगा ईस्ट तुर्किस्तान? फिर से उठी आजादी की मांग

वॉशिंगटन/ईस्ट तुर्किस्तान, 9 अप्रैल 2026: पूर्वी तुर्किस्तान (जिसे चीन शिनजियांग उइगुर स्वायत्त क्षेत्र कहता है) में आजादी की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है। उइगुर समुदाय और निर्वासित संगठन लगातार चीन की कथित कब्जे, सांस्कृतिक दमन और जनसंहार के आरोपों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल आर्मी की 81वीं वर्षगांठ पर निर्वासित समूहों ने स्वतंत्रता की पुकार दोहराई है।

ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एग्जाइल (ETGE) और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट ने हाल के दिनों में अमेरिका, कनाडा और अन्य देशों में प्रदर्शन किए। उन्होंने चीन से “कब्जा समाप्त करने” और पूर्वी तुर्किस्तान को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की मांग की। ETGE के अनुसार, 1949 में चीनी सेना के आक्रमण के बाद से यह क्षेत्र कब्जे में है और पिछले 76 वर्षों से उइगुर, कजाख तथा अन्य तुर्किक समुदायों पर दमन जारी है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पूर्वी तुर्किस्तान ने 1933 और 1944 में दो बार स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया था, लेकिन दोनों बार बाहरी हस्तक्षेप के कारण यह टिक नहीं सका। 1949 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रवेश के बाद इसे चीन में शामिल कर लिया गया। उइगुर समुदाय इसे अपनी जमीन पर चीनी उपनिवेशवाद मानता है।

वर्तमान स्थिति

निर्वासित सरकार और संगठन (जैसे वर्ल्ड उइगुर कांग्रेस) हर साल 12 नवंबर को ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल डे और अन्य ऐतिहासिक तारीखों पर स्मरण और प्रदर्शन करते हैं। 2025-26 में भी अबरूज, नेशनल आर्मी डे और आक्रमण की वर्षगांठ पर वैश्विक कार्यक्रम हुए।

आरोप हैं कि चीन में बड़े पैमाने पर निगरानी, जबरन श्रम, धार्मिक प्रतिबंध और सांस्कृतिक मिटाने की नीतियां चल रही हैं, जिसे कई पश्चिमी देश और मानवाधिकार संगठन “जनसंहार” या “मानवता के खिलाफ अपराध” कहते हैं।

उइगुर जिहादी समूह (जैसे तुर्किस्तान इस्लामिक पार्टी) सीरिया और अफगानिस्तान में सक्रिय बताए जा रहे हैं और चीन के खिलाफ लड़ाई की बात करते हैं, हालांकि मुख्य धारा की आजादी की मांग शांतिपूर्ण राजनीतिक है।

चीन का रुख

चीन इन सभी मांगों को “आतंकवाद, अलगाववाद और धार्मिक चरमपंथ” का रूप बताता है। वह शिनजियांग को अपने अभिन्न अंग मानता है और विकास, स्थिरता तथा आतंकवाद विरोधी अभियानों का दावा करता है। चीन किसी भी अलगाव की मांग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।

क्या नया देश बन पाएगा?

विश्लेषकों के अनुसार, चीन की मजबूत सैन्य और आर्थिक पकड़ के कारण ईस्ट तुर्किस्तान के अलग होने की संभावना बहुत कम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कुछ देश (विशेषकर पश्चिमी) मानवाधिकार मुद्दे उठाते हैं, लेकिन कोई भी बड़ा देश चीन से सीधा टकराव नहीं चाहता। उइगुर डायस्पोरा अमेरिका, यूरोप और तुर्की में सक्रिय है, लेकिन क्षेत्र के अंदर किसी बड़े विद्रोह की खबर नहीं है।

ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट ने हाल ही में कहा कि “हम अपने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं और चीन के उपनिवेशवाद, जनसंहार और कब्जे को समाप्त कर स्वतंत्रता बहाल करने की प्रतिबद्धता जताते हैं।”

यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकार बहस का हिस्सा बना हुआ है, लेकिन भू-राजनीतिक हकीकत के कारण पूर्ण स्वतंत्रता दूर की कौड़ी लग रही है। उइगुर समुदाय अपनी सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखे हुए है।

(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध खुली सूचनाओं, निर्वासित संगठनों के बयानों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर आधारित है। चीन इन आरोपों से इनकार करता है।)

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