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​दुनिया में टेंशन, पर भारत में ‘जश्न’! वर्ल्ड बैंक ने बढ़ाया भारत का ग्रोथ अनुमान, विदेशी मोर्चे पर मिली बड़ी कामयाबी

दुनियाभर में जारी युद्ध और आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबरें सामने आ रही हैं। वैश्विक मंदी और ईरान-इजरायल जैसे तनावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार रुकने का नाम नहीं ले रही है।

​दुनिया में टेंशन, पर भारत में ‘जश्न’! वर्ल्ड बैंक ने बढ़ाया भारत का ग्रोथ अनुमान, विदेशी मोर्चे पर मिली बड़ी कामयाबी

​नई दिल्ली: जहाँ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी और युद्ध के साये में सुस्त पड़ रही हैं, वहीं भारत के लिए विदेशी संस्थाओं से ‘गुड न्यूज’ आ रही है। वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत की विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को बढ़ा दिया है, जो यह दर्शाता है कि ग्लोबल टेंशन का भारत पर असर न के बराबर है।

​1. वर्ल्ड बैंक ने थपथपाई भारत की पीठ

​वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 6.6% कर दिया है।

​मजबूत घरेलू मांग: रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था अपनी मजबूत आंतरिक खपत (Domestic Demand) के कारण बाहरी झटकों को झेलने में सक्षम है।

​दक्षिण एशिया का इंजन: वर्ल्ड बैंक ने माना है कि पूरे दक्षिण एशिया में भारत ही वह इकलौता स्तंभ है जो स्थिर बना हुआ है।

​2. विदेशी ट्रेड में ऐतिहासिक समझौता

​ग्लोबल टेंशन के बीच भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ (FTA) की दिशा में बड़ी बढ़त हासिल की है। इसे 2026 की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है।

​फायदा: इससे भारतीय कपड़ा, दवाओं और कृषि उत्पादों के लिए यूरोप के बाजार खुल जाएंगे।

​विकल्प: यह समझौता चीन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत करने में मदद करेगा।

​3. ‘पीस आर्किटेक्ट’ के रूप में उभरता भारत

​रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया (Middle East) के संघर्षों के बीच भारत एक ‘शांति दूत’ बनकर उभरा है।

​डिप्लोमैटिक बैलेंस: भारत ने ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह के लिए 10 साल का समझौता कर अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित की है, वहीं इजरायल के साथ ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ को भी नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है।

​दुनिया का भरोसा: ग्लोबल एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत आज एकमात्र ऐसी शक्ति है जिसके पास मॉस्को, कीव, तेहरान और वाशिंगटन—सभी का भरोसा है।

​4. मैन्युफैक्चरिंग हब बनता देश

​सरकार की PLI स्कीम के कारण सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में अरबों डॉलर का विदेशी निवेश (FDI) भारत आ रहा है। दुनिया की बड़ी कंपनियां अब अपने कारखाने चीन से हटाकर भारत में शिफ्ट कर रही हैं, जिससे ‘ग्लोबल ट्रेड वॉर’ का डर भी धुआं-धुआं हो गया है।

​विशेषज्ञ का विश्लेषण: “जब दुनिया में अनिश्चितता होती है, तो निवेशक सुरक्षित ठिकाना ढूंढते हैं। 2026 में भारत वही ‘सेफ हेवन’ बनकर उभरा है। हमारी इकॉनमी अब बाहरी खतरों से डरने के बजाय उन्हें अवसरों में बदल रही है।”

​निष्कर्ष: साफ है कि भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि दुनिया की आर्थिक और कूटनीतिक धुरी बन चुका है। ‘ग्लोबल टेंशन’ के बीच भारत की यह तरक्की विरोधियों के लिए बड़ा संदेश है।

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