मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज: 193 सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस को सदन में स्वीकार नहीं किया
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव खारिज: 193 सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस को सदन में स्वीकार नहीं किया
नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव के नोटिस को खारिज कर दिया गया है। विपक्षी दलों के 193 सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) के हस्ताक्षर वाले इस नोटिस को लोकसभा स्पीकर और राज्यसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया।
मार्च 2026 में विपक्ष (मुख्य रूप से INDIA गठबंधन और TMC की अगुवाई में) ने CEC पर पक्षपातपूर्ण आचरण, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में अनियमितताओं, मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने और चुनावी प्रक्रिया में बाधा डालने जैसे 7 गंभीर आरोप लगाते हुए महाभियोग का नोटिस दिया था। यह देश के इतिहास में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पहला ऐसा प्रयास था।
हालांकि, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत महाभियोग प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए सदन में पर्याप्त समर्थन और बहुमत की जरूरत होती है। विपक्ष के पास दो-तिहाई बहुमत नहीं होने के कारण प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा अध्यक्ष ने नोटिस को खारिज कर दिया, जिससे बजट सत्र में यह मुद्दा आगे नहीं बढ़ सका।
विपक्ष ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया, जबकि सत्तापक्ष ने आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया। चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पहले CEC ने कहा था कि वे राजनीतिक बयानों पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।
यह घटना चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची संशोधन (खासकर पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में) को लेकर चल रहे विवादों के बीच आई है। विपक्ष अब इस मुद्दे को बाहर सड़कों और अदालतों में उठाने की तैयारी में है।
महाभियोग की प्रक्रिया काफी कठिन है – इसे सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है, जिसमें दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है।
