तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ मामला: 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
तमिलनाडु कस्टोडियल डेथ मामला: 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा
मदुरै की एक अदालत ने 2020 के बहुचर्चित पी. जेयराज और उनके बेटे बेनिक्स की पुलिस हिरासत में हुई हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इसे “सत्ता के दुरुपयोग का सबसे वीभत्स उदाहरण” मानते हुए दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है।
1. अदालत का कड़ा रुख और जुर्माना
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मामला सामान्य से परे है।
* दोषियों की संख्या: कुल 10 आरोपी पुलिसकर्मियों में से एक की मौत पहले ही हो चुकी थी, शेष सभी 9 जीवित पुलिसकर्मियों को दोषी मानकर मृत्युदंड दिया गया।
* प्रमुख दोषी: सजा पाने वालों में तत्कालीन पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर भी शामिल हैं, जिन पर अदालत ने 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
* अदालत की टिप्पणी: कोर्ट ने कहा कि मामले की दरिंदगी ऐसी है कि इसे पढ़ते हुए “दिल दहल उठता है।” पिता-पुत्र को नंगा कर बेरहमी से पीटा गया था।
2. “सत्ता का दुरुपयोग और परिवार की तबाही”
अदालत ने पुलिसिया तंत्र की विफलता और क्रूरता पर तीखी टिप्पणियां कीं:
* तनाव कोई बहाना नहीं: कोर्ट ने दो टूक कहा कि जनता के पैसों से वेतन पाने वाले अधिकारी अपने अपराध के लिए ‘काम के तनाव’ को ढाल नहीं बना सकते।
* निगरानी की भूमिका: यदि अदालत इस मामले की निगरानी (Monitoring) नहीं करती, तो सच को दबा दिया गया होता।
* कठोर सजा की जरूरत: फैसले में कहा गया कि उम्रकैद जैसी सजा पुलिस विभाग में व्याप्त ऐसी क्रूरता को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं थी; दोषियों के मन में भय पैदा करने के लिए फांसी जरूरी थी।
3. क्या था पूरा मामला? (घटनाक्रम)
यह मामला जून 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान थूथुकुडी जिले के सथानकुलम में शुरू हुआ था:
* गिरफ्तारी का कारण: 19 जून 2020 को पुलिस ने पी. जेयराज को हिरासत में लिया। उन पर आरोप था कि उन्होंने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर अपनी मोबाइल की दुकान तय समय के बाद भी खुली रखी थी।
* थाने में विवाद: जब बेटा बेनिक्स अपने पिता को छुड़ाने थाने पहुँचा, तो वहां पुलिस द्वारा पिता को दी जा रही गालियों का विरोध करने पर विवाद बढ़ गया।
* रातभर बर्बरता: पुलिस ने पिता-पुत्र दोनों को पूरी रात थाने में बंद रखा और उन्हें अमानवीय यातनाएं दीं।
* हिरासत में मौत: अगले दिन उन्हें मेडिकल उपचार दिए बिना जेल भेज दिया गया। 22 जून को बेनिक्स की और 23 जून को जेयराज की अस्पताल में मौत हो गई।
4. जांच और न्याय की प्रक्रिया
मौत के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद मामले की जांच की कमान संभाली गई:
* FIR और जांच: शुरुआती जांच सीबी-सीआईडी (CB-CID) ने की, जिसे बाद में CBI को सौंप दिया गया।
* CCTV फुटेज: आमतौर पर ऐसे मामलों में सबूतों का अभाव होता है, लेकिन इस केस में CCTV फुटेज ने दोषियों को बेनकाब करने में अहम भूमिका निभाई।
* आरोपियों का विवरण: सीबीआई ने 10 पुलिसकर्मियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। एक आरोपी (पॉलदुरै) की मौत 2020 में कोरोना से हो गई थी, जबकि बाकी 9 को अब फांसी की सजा सुनाई गई है।
निष्कर्ष: यह फैसला भारतीय न्यायपालिका के उस संकल्प को दर्शाता है जहां वर्दी की आड़ में छिपे अपराधियों को उनके किए की सबसे सख्त सजा दी गई, ताकि भविष्य में कानून के रखवाले ही कानून को हाथ में न लें।
