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आत्मनिर्भर भारत: भारतीय वायुसेना खरीदेगी 1,000 किलो के ‘देसी’ बम; अमेरिकी MK-84 जैसी होगी मारक क्षमता

आत्मनिर्भर भारत: भारतीय वायुसेना खरीदेगी 1,000 किलो के ‘देसी’ बम; अमेरिकी MK-84 जैसी होगी मारक क्षमता

भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी युद्धक क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर और अधिक घातक बनाने के लिए एक बड़े रक्षा सौदे की तैयारी में है। रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए अमेरिकी MK-84 श्रेणी के बराबर शक्तिशाली, 1,000 किलोग्राम वजनी हवाई बमों के स्वदेशी डिजाइन और विकास की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह कदम न केवल विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की ‘डीप स्ट्राइक’ क्षमता को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।

1. अमेरिकी MK-84 के बराबर होगी ताकत

वायुसेना द्वारा जारी Expression of Interest (EoI) के अनुसार, ये नए बम लगभग 2,000 पाउंड (1,000 किलो) के होंगे।

* विनाशकारी प्रभाव: ये बम ‘हाई-कैलिबर म्यूनिशन’ श्रेणी के हैं, जो दुश्मन के बंकरों, रनवे, बड़े गोदामों और युद्धपोतों को पूरी तरह नष्ट करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

* स्मार्ट तकनीक: इन्हें आधुनिक गाइडेड सिस्टम से जोड़कर ‘प्रिसिजन बम’ में बदला जा सकेगा, जिससे ये लक्ष्य को अचूक सटीकता से भेद पाएंगे।

2. स्वदेशी लड़ाकू विमानों के लिए ‘यूनिवर्सल फिट’

इन बमों की सबसे बड़ी विशेषता इनका बहुमुखी होना है। इन्हें इस तरह विकसित किया जा रहा है कि ये भारत के पास मौजूद अलग-अलग ओरिजिन के विमानों के साथ काम कर सकें:

* रूसी मूल: सुखोई (Su-30 MKI)

* फ्रांसीसी मूल: राफेल (Rafale) और मिराज-2000

* स्वदेशी: तेजस (LCA Tejas)

3. खरीद और निर्माण की योजना (Make-II प्रोजेक्ट)

रक्षा मंत्रालय ने इस प्रोजेक्ट को Make-II (उद्योग वित्त पोषित) श्रेणी के तहत रखा है।

* शुरुआती ऑर्डर: सफल परीक्षण के बाद भारतीय वायुसेना 600 बमों का पहला बड़ा ऑर्डर देगी।

* 50% स्वदेशी सामग्री: विकास प्रक्रिया के दौरान इन बमों में कम से कम 50% सामग्री भारतीय होनी अनिवार्य है।

* समय सीमा: विशेषज्ञों के अनुसार, डिजाइन और परीक्षण से लेकर अंतिम कॉन्ट्रैक्ट साइन होने तक लगभग 2.5 साल का समय लगेगा।

4. क्यों पड़ी इन बमों की जरूरत?

वर्तमान में, भारतीय वायुसेना इस श्रेणी के भारी बमों के लिए विदेशी मूल के उपकरणों (OEMs) पर निर्भर है। हाल के वैश्विक भू-राजनीतिक हालातों को देखते हुए, भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित करना चाहता है। 1,000 किलो का यह बम दुश्मन के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा, खासकर पहाड़ों में बने मजबूत बंकरों या रणनीतिक ठिकानों के खिलाफ।

 

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