‘समोसे-पिज्जा का मुद्दा उठाते हैं…’, अपनों के निशाने पर आए राघव चड्ढा; सीएम मान और आतिशी ने जमकर घेरा
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मची रार अब पूरी तरह से सतह पर आ गई है। पार्टी के सबसे युवा और चर्चित चेहरों में से एक राघव चड्ढा को न केवल राज्यसभा में उपनेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया गया है, बल्कि उनके बोलने पर भी पाबंदी लगाने की कोशिश की गई है।
‘समोसे-पिज्जा का मुद्दा उठाते हैं…’, अपनों के निशाने पर आए राघव चड्ढा; सीएम मान और आतिशी ने जमकर घेरा
आम आदमी पार्टी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक हो चुकी है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, जिन्हें कभी अरविंद केजरीवाल का सबसे भरोसेमंद सिपहसालार माना जाता था, अब पार्टी में ही अलग-थलग पड़ गए हैं। गुरुवार को उन्हें राज्यसभा उपनेता के पद से हटाकर उनकी जगह अशोक मित्तल को नियुक्त कर दिया गया।
सीएम भगवंत मान का ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ वाला आरोप
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने चड्ढा को ‘कॉम्प्रोमाइज्ड’ (समझौतावादी) करार देते हुए कहा:
“जब पश्चिम बंगाल में वोट काटे जाने या गुजरात में हमारे कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी जैसे गंभीर मुद्दे थे, तब राघव चड्ढा ने संसद में इनकी जगह समोसे की बढ़ती कीमतों और पिज्जा डिलीवरी जैसे हल्के मुद्दों को उठाया। वे गंभीर राजनीतिक लड़ाई से पीछे हट गए हैं।”
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि संसद में विपक्षी वॉकआउट के दौरान राघव का अपनी सीट पर बैठे रहना सीधे तौर पर ‘पार्टी व्हिप’ का उल्लंघन था।
आतिशी ने भी साधा निशाना
दिल्ली की कैबिनेट मंत्री आतिशी ने भी राघव चड्ढा पर निशाना साधते हुए उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए। उन्होंने चड्ढा के लंदन दौरे और वहां कराई गई आंख की सर्जरी का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या वे “मोदी सरकार के डर से” देश छोड़कर गए थे? आतिशी ने आरोप लगाया कि जब पार्टी और कार्यकर्ता संकट में थे, तब चड्ढा उनके साथ खड़े नहीं हुए।
राघव चड्ढा का पलटवार: “खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं”
पद से हटाए जाने के एक दिन बाद शुक्रवार (3 अप्रैल 2026) को राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने भावुक होते हुए कहा:
* बोलने पर पाबंदी: “पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर मेरे बोलने के अधिकार (Speaking Time) को छीनने की कोशिश की है। मुझे खामोश किया जा रहा है।”
* संदेश: उन्होंने अपने समर्थकों से कहा, “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझिएगा। मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूँ।”
क्यों हुई यह कार्रवाई? (Inside Story)
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की रिहाई के बाद राघव चड्ढा का उनके साथ न दिखना और महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस से गायब रहना पार्टी नेतृत्व को रास नहीं आया।
* अनुशासनहीनता: पार्टी लाइन से हटकर रुख अपनाना और संसद में ‘व्हिप’ की अनदेखी।
* दूरी: केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय लंबे समय तक विदेश में रहना।
* नया चेहरा: पंजाब विधानसभा चुनावों को देखते हुए पार्टी अब अशोक मित्तल जैसे चेहरों को आगे बढ़ाना चाहती है।
मुख्य बिंदु:
* बदलाव: राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल बने राज्यसभा उपनेता।
* प्रतिबंध: पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से चड्ढा को बोलने का समय न देने का अनुरोध किया।
* विपक्ष का तंज: बीजेपी ने इसे “केजरीवाल की तानाशाही” करार देते हुए कहा कि स्वाति मालीवाल के बाद अब चड्ढा का नंबर है।
इस घटनाक्रम ने संकेत दे दिए हैं कि आम आदमी पार्टी में अब राघव चड्ढा के लिए राह आसान नहीं होने वाली है। क्या वे पार्टी छोड़ेंगे या यह लड़ाई और बढ़ेगी, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।
