परमाणु शक्ति से ‘शांतिदूत’ बनने का सफर: जानिए उस देश की कहानी जिसने खुद तोड़े अपने परमाणु बम
मध्य-पूर्व में ईरान, इजराइल और अन्य देशों के बीच परमाणु हथियारों की होड़ और युद्ध के मंडराते खतरों के बीच, इतिहास के पन्नों में एक ऐसा देश भी है जिसने दुनिया को चौंका दिया था। यह कहानी है दक्षिण अफ्रीका (South Africa) की—दुनिया का इकलौता देश जिसने परमाणु बम बनाए, उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए तैनात किया और फिर अपनी मर्जी से उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया।
परमाणु शक्ति से ‘शांतिदूत’ बनने का सफर: जानिए उस देश की कहानी जिसने खुद तोड़े अपने परमाणु बम
आज जब दुनिया परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ी महसूस होती है, तब दक्षिण अफ्रीका का उदाहरण एक मिसाल की तरह देखा जाता है। 1970 और 80 के दशक में, दक्षिण अफ्रीका ने गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित किए थे, लेकिन 1990 के दशक की शुरुआत में उसने एक ऐसा फैसला लिया जिसे ‘अकल्पनीय’ माना गया।
क्यों बनाए थे परमाणु बम?
1970 के दशक में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद (Apartheid) की सरकार थी। उस समय देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गया था। पड़ोसी देशों (जैसे अंगोला) में सोवियत संघ समर्थित कम्युनिस्ट सेनाओं का दखल बढ़ रहा था। अपनी सुरक्षा और अस्तित्व को बचाने के लिए दक्षिण अफ्रीका ने ‘प्रोजेक्ट एडलर’ के तहत परमाणु बम बनाने का फैसला किया।
* क्षमता: 1989 तक दक्षिण अफ्रीका के पास 6 तैयार परमाणु बम थे और सातवां बन रहा था।
* परीक्षण: 1979 में हिंद महासागर में एक रहस्यमयी रोशनी देखी गई थी (वेला इंसीडेंट), जिसे दक्षिण अफ्रीका का गुप्त परमाणु परीक्षण माना जाता है।
नष्ट करने का फैसला: टर्निंग पॉइंट
1989 में जब एफ.डब्ल्यू. डी क्लार्क राष्ट्रपति बने और शीत युद्ध (Cold War) खत्म होने लगा, तो स्थितियां बदलने लगीं। नेल्सन मंडेला की रिहाई और लोकतंत्र की बहाली की आहट सुनाई दे रही थी। डी क्लार्क ने एक साहसिक निर्णय लिया:
* डर: माना जाता है कि तत्कालीन श्वेत सरकार नहीं चाहती थी कि परमाणु हथियारों की कमान भविष्य की अश्वेत सरकार (ANC) के हाथों में जाए।
* अंतरराष्ट्रीय छवि: दक्षिण अफ्रीका दुनिया की मुख्यधारा में वापस लौटना चाहता था और प्रतिबंधों से मुक्ति चाहता था।
कैसे किया गया विनाश?
1990 में दक्षिण अफ्रीका ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने का आदेश दिया।
* गोपनीयता: बेहद सावधानी से सभी 6 बमों को विघटित (Dismantle) किया गया।
* NPT पर हस्ताक्षर: 1991 में दक्षिण अफ्रीका ने ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) पर एक गैर-परमाणु देश के रूप में हस्ताक्षर किए।
* IAEA की जांच: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को बुलाकर पुष्टि कराई गई कि अब देश के पास एक भी परमाणु हथियार नहीं बचा है।
दुनिया के लिए संदेश
आज जहाँ उत्तर कोरिया, ईरान और इजराइल जैसे देश परमाणु शक्ति को ही अंतिम सुरक्षा कवच मानते हैं, वहीं दक्षिण अफ्रीका ने साबित किया कि परमाणु मुक्त होकर भी एक राष्ट्र सुरक्षित और सम्मानित रह सकता है। 1993 में डी क्लार्क ने आधिकारिक तौर पर संसद में स्वीकार किया कि उनके पास परमाणु हथियार थे और अब वे नष्ट किए जा चुके हैं।
मुख्य तथ्य:
* देश: दक्षिण अफ्रीका।
* कुल बम: 6 तैयार, 1 निर्माणाधीन।
* तारीख: 1991 तक पूरी तरह निशस्त्रीकरण (Disarmament)।
* विरासत: यह आज भी दुनिया का एकमात्र देश है जिसने खुद परमाणु हथियार विकसित कर उन्हें स्वेच्छा से नष्ट किया। (यूक्रेन, बेलारूस और कजाकिस्तान के पास सोवियत संघ के बम थे, उन्होंने खुद नहीं बनाए थे)।
मध्य-पूर्व के तनावपूर्ण माहौल में, दक्षिण अफ्रीका की यह कहानी याद दिलाती है कि शांति का रास्ता हथियारों के ढेर से नहीं, बल्कि कूटनीति और इच्छाशक्ति से निकलता है।
