”मेरी खामोशी को हार मत समझना…” : पद छिनने के बाद राघव चड्ढा का ‘क्रिप्टिक’ वार, क्या AAP में शुरू हुई ‘गृहयुद्ध’ की तैयारी?
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर संगठनात्मक स्तर पर एक बड़ा भूचाल देखने को मिल रहा है। पार्टी ने अपने सबसे चर्चित और मुखर चेहरों में से एक, राघव चड्ढा को राज्यसभा में उप-नेता (Deputy Leader) के पद से हटा दिया है। उनकी जगह पंजाब से सांसद और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के संस्थापक अशोक कुमार मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पार्टी का कड़ा एक्शन: बोलने का समय भी छीना
सूत्रों के अनुसार, AAP ने न केवल राघव चड्ढा को पद से हटाया है, बल्कि राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में पार्टी के कोटे से राघव चड्ढा को बोलने का समय (Speaking Time) आवंटित न किया जाए। यह कदम इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी और चड्ढा के बीच दूरियां काफी बढ़ चुकी हैं।
क्यों गिरी राघव पर गाज?
सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। इसके पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं:
* लंबी खामोशी: अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के दौरान राघव चड्ढा की लंबी अनुपस्थिति और चुप्पी से पार्टी नेतृत्व नाराज बताया जा रहा है।
* कार्यक्रमों से दूरी: पिछले कुछ समय से चड्ढा पार्टी के महत्वपूर्ण प्रदर्शनों और रणनीतिक बैठकों में नजर नहीं आ रहे थे।
* स्टार प्रचारक की सूची से बाहर: हाल ही में उन्हें पार्टी की आगामी चुनाव के लिए स्टार प्रचारकों की लिस्ट से भी हटा दिया गया था।
राघव चड्ढा का ‘क्रिप्टिक’ रिएक्शन: “खामोशी को हार मत समझना”
पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो और संदेश तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने अपनी स्थिति पर एक ‘शायराना’ लेकिन तीखा अंदाज अपनाते हुए कहा:
“मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं समंदर हूँ, लौटकर जरूर आऊंगा।”
उनके इस बयान को समर्थकों द्वारा पार्टी नेतृत्व के खिलाफ एक ‘मौन चेतावनी’ के रूप में देखा जा रहा है।
अशोक मित्तल का बयान: “यह एक सामान्य प्रक्रिया”
वहीं, नई जिम्मेदारी संभालने वाले अशोक कुमार मित्तल ने इस बदलाव को सामान्य बताया है। उन्होंने कहा, “पार्टी चाहती है कि सभी सांसदों को प्रशासनिक और विधायी कौशल सीखने का मौका मिले। पहले एनडी गुप्ता जी थे, फिर राघव जी और अब मुझे मौका मिला है। हम सब मिलकर पार्टी की आवाज सदन में बुलंद करेंगे।”
विपक्ष का तंज: “AAP में वफादारों की जगह नहीं”
इस घटनाक्रम पर विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा ने चुटकी ली है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि जो नेता केजरीवाल के लिए ‘संकटमोचक’ हुआ करते थे, आज उन्हें ही किनारे लगाया जा रहा है। इससे साफ है कि आम आदमी पार्टी के भीतर ‘ऑल इज नॉट वेल’।
