चारधाम यात्रा 2026: ईंधन संकट से निपटने को उत्तराखंड सरकार का ‘मास्टरप्लान’, LPG के साथ लकड़ी का भी बड़ा स्टॉक तैयार
चारधाम यात्रा 2026: ईंधन संकट से निपटने को उत्तराखंड सरकार का ‘मास्टरप्लान’, LPG के साथ लकड़ी का भी बड़ा स्टॉक तैयार
आगामी चारधाम यात्रा 2026 को सुगम और निर्बाध बनाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कमर कस ली है। इस वर्ष यात्रा अप्रैल के दूसरे सप्ताह (19 अप्रैल) से शुरू होने के कारण यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए शासन ने एलपीजी (LPG), जलाऊ लकड़ी और पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति को लेकर एक व्यापक रणनीति तैयार की है, ताकि श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों को किसी भी तरह की किल्लत का सामना न करना पड़े।
LPG की मांग का सटीक आकलन
पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के अनुसार, इस बार यात्रा सीजन के दौरान गैस की मांग में भारी उछाल आने का अनुमान है। शासन द्वारा किए गए विस्तृत विश्लेषण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
* तीन प्रमुख जिले: उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग में हर महीने 15 से 16 हजार व्यावसायिक सिलेंडरों की मांग रहने की संभावना है।
* सात यात्रा मार्ग जिले: हरिद्वार, देहरादून और टिहरी सहित कुल सात जिलों में प्रति माह लगभग 1.11 लाख अतिरिक्त सिलेंडरों की आवश्यकता होगी।
* दैनिक खपत: यात्रा मार्ग पर प्रतिदिन करीब 3,500 अतिरिक्त सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।
खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त आनंद स्वरूप ने आश्वस्त किया है कि ऑयल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाए रखने के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं।
वैकल्पिक ऊर्जा और लकड़ी का भंडारण
संभावित दबाव को देखते हुए सरकार केवल LPG पर निर्भर नहीं रहना चाहती। इसके लिए ‘प्लान-बी’ के तहत निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
* जलाऊ लकड़ी का भंडार: वन विकास निगम ने 26 टालों पर 3,354 क्विंटल से अधिक जलाऊ लकड़ी का स्टॉक जमा कर लिया है। विशेषकर सोनप्रयाग और ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) जैसे संवेदनशील पड़ावों पर लकड़ी की टालों को और मजबूत किया जा रहा है।
* इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग: पर्यटन विभाग ने होटल व्यवसायियों से अपील की है कि वे एलपीजी के विकल्प के रूप में इलेक्ट्रॉनिक चूल्हों और उपकरणों का उपयोग करें। ऊर्जा विभाग को इसके लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
वाहनों की भारी आमद पर सरकार सतर्क
पिछले साल यात्रा के दौरान करीब 5.14 लाख वाहन उत्तराखंड पहुंचे थे। इस साल यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। मुख्य सचिव स्तर पर हर दूसरे दिन पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति की समीक्षा की जा रही है ताकि ऊंचे पहाड़ी इलाकों में ईंधन की कमी न हो।
सरकार की अपील: “प्रशासन हर स्तर पर तैयार है। श्रद्धालुओं और व्यवसायियों से अनुरोध है कि वे संसाधनों का संयम से उपयोग करें और घबराहट में आकर किसी भी वस्तु का अनावश्यक भंडारण न करें।” — पर्यटन विभाग, उत्तराखंड
