असम में अजमल और बंगाल में हुमायूं: ओवैसी का ‘ईस्टर्न गेम प्लान’, जानें किसे होगा फायदा और किसे बड़ा नुकसान
विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM) ने पूर्वी भारत, खासकर असम और पश्चिम बंगाल के लिए एक बड़ा सियासी दांव खेला है। ओवैसी का यह कदम केवल सीटें जीतने के लिए नहीं, बल्कि मुस्लिम राजनीति के केंद्र में खुद को स्थापित करने का ‘मास्टर प्लान’ नजर आ रहा है।
यहाँ जानिए ओवैसी का पूरा गेम प्लान और इसके संभावित फायदे व नुकसान:
असम में अजमल और बंगाल में हुमायूं: ओवैसी का ‘ईस्टर्न गेम प्लान’, जानें किसे होगा फायदा और किसे बड़ा नुकसान
कोलकाता/गुवाहाटी: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बीच ओवैसी ने अपनी रणनीति बदल दी है। इस बार वह अकेले चुनाव लड़ने के बजाय क्षेत्रीय मुस्लिम चेहरों के साथ गठबंधन कर रहे हैं। असम में उन्होंने बदरुद्दीन अजमल (AIUDF) और पश्चिम बंगाल में पूर्व टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर (AJUP) से हाथ मिलाया है।
1. ओवैसी का गेम प्लान क्या है?
ओवैसी का मुख्य उद्देश्य ‘स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व’ (Independent Muslim Leadership) खड़ा करना है।
* बंगाल में: उन्होंने हुमायूं कबीर की ‘आम जनता उन्नयन पार्टी’ (AJUP) के साथ गठबंधन किया है, जो करीब 149 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
* असम में: ओवैसी ने बदरुद्दीन अजमल की AIUDF को समर्थन देने और उनके लिए चुनाव प्रचार (अप्रैल के पहले हफ्ते में) करने का फैसला किया है।
2. किसे होगा ‘नुकसान’?
ओवैसी के इस कदम से सबसे ज्यादा खतरा ममता बनर्जी (TMC) और कांग्रेस-यूनाइटेड फ्रंट को है।
* ममता की टेंशन: पश्चिम बंगाल में करीब 30% मुस्लिम वोट बैंक है, जो पारंपरिक रूप से टीएमसी का साथ देता रहा है। हुमायूं कबीर और ओवैसी की जोड़ी अगर इस वोट बैंक में 5-10% की भी सेंध लगाती है, तो टीएमसी के लिए बहुमत का आंकड़ा पाना मुश्किल हो सकता है।
* असम में कांग्रेस: असम में बदरुद्दीन अजमल और ओवैसी का साथ आना कांग्रेस के लिए खतरे की घंटी है, क्योंकि दोनों का आधार वोट बैंक एक ही है।
3. किसे होगा ‘फायदा’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्षी वोटों का यह बिखराव सीधे तौर पर बीजेपी (BJP) को फायदा पहुंचा सकता है।
* ध्रुवीकरण (Polarization): ओवैसी की मौजूदगी अक्सर चुनाव को ‘हिंदू बनाम मुस्लिम’ के ध्रुवीकरण की ओर ले जाती है, जिसका लाभ बीजेपी को मिलता है।
* वोटों का बंटवारा: मुस्लिम वोटों के तीन हिस्सों (TMC/कांग्रेस, ओवैसी-हुमायूं, और निर्दलीय) में बंटने से बीजेपी की जीत की राह आसान हो सकती है।
4. ओवैसी के लिए इसमें क्या है?
ओवैसी खुद को केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं रखना चाहते। वह दिखाना चाहते हैं कि:
* वह पूरे देश के मुसलमानों के एकमात्र राष्ट्रीय नेता हैं।
* वह ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकते हैं (जैसा कि उन्होंने बिहार चुनावों में किया था)।
* क्षेत्रीय पार्टियों (जैसे TMC) को यह संदेश देना कि मुस्लिम वोटों को अब ‘गारंटीड’ न माना जाए।
प्रमुख गठबंधन और आंकड़े (2026 चुनाव)
| राज्य | सहयोगी नेता/पार्टी | मुख्य प्रभाव क्षेत्र | लक्ष्य |
| पश्चिम बंगाल | हुमायूं कबीर (AJUP) | मुर्शिदाबाद, मालदा, दिनाजपुर | टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक में सेंध |
| असम | बदरुद्दीन अजमल (AIUDF) | धुबरी, बराक घाटी, निचला असम | मुस्लिम नेतृत्व को मजबूत करना |
निष्कर्ष: ओवैसी का यह ‘गेम प्लान’ विपक्षी एकता के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह होगा कि क्या मुस्लिम मतदाता ‘मजबूत सरकार’ के नाम पर टीएमसी/कांग्रेस के साथ रहते हैं या ‘अपनी नेतृत्व’ के नाम पर ओवैसी-अजमल-हुमायूं की तिकड़ी को चुनते हैं।
