उत्तराखंड कांग्रेस में ‘महाभारत’: संजय नेगी की ज्वाइनिंग रुकी तो ‘हरदा’ गए अवकाश पर; रणजीत रावत की चुटकी ने बढ़ाई तपिश
उत्तराखंड कांग्रेस में एक बार फिर ‘अपनों’ की जंग सड़क पर आ गई है। दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (हरदा) की नाराजगी ने पार्टी के भीतर मचे घमासान को जगजाहिर कर दिया है। 28 मार्च को दिल्ली में हुई नेताओं की ज्वाइनिंग और उसके बाद ‘हरदा’ के 15 दिन के ‘राजनीतिक अवकाश’ ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
उत्तराखंड कांग्रेस में ‘महाभारत’: संजय नेगी की ज्वाइनिंग रुकी तो ‘हरदा’ गए अवकाश पर; रणजीत रावत की चुटकी ने बढ़ाई तपिश
उत्तराखंड की राजनीति में होली के बाद का खुमार अभी उतरा भी नहीं था कि कांग्रेस के भीतर ‘खींचतान’ का नया अध्याय शुरू हो गया। 28 मार्च को दिल्ली में कांग्रेस ने बीजेपी के कुछ पूर्व विधायकों और निर्दलीयों को शामिल कर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की, लेकिन पार्टी के सबसे बड़े चेहरे हरीश रावत की गैरमौजूदगी और उनके ‘मौन विरोध’ ने इस जश्न के रंग में भंग डाल दिया है।
1. क्या है नाराजगी की असली जड़?
सूत्रों के मुताबिक, विवाद की जड़ संजय नेगी की ज्वाइनिंग है। हरीश रावत चाहते थे कि रामनगर के संघर्षशील नेता और ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी को भी 28 मार्च को पार्टी में शामिल किया जाए। लेकिन पार्टी के भीतर एक धड़े (विशेषकर रणजीत रावत गुट) के कड़े विरोध के चलते ऐन वक्त पर संजय नेगी का नाम लिस्ट से काट दिया गया।
2. 15 दिन का ‘राजनीतिक अवकाश’ या शक्ति प्रदर्शन?
अपनी बात अनसुनी किए जाने से आहत हरीश रावत ने ज्वाइनिंग से ठीक एक दिन पहले (27 मार्च) सोशल मीडिया पर ’15 दिन के राजनीतिक अवकाश’ की घोषणा कर दी। हालांकि, इस ‘अवकाश’ के दौरान वे शांत नहीं हैं; वे लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं, जिसे हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
3. दिग्गज नेताओं के बीच जुबानी जंग
* संजय नेगी का दर्द: उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी ज्वाइनिंग रुकने से हरीश रावत नाराज हैं। उनका मानना है कि युवाओं को रोकना संगठन के लिए गलत संदेश है।
* रणजीत रावत की चुटकी: पूर्व विधायक रणजीत रावत ने इस विवाद पर तंज कसते हुए कहा कि “उपवास (अवकाश) स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।” उन्होंने यह भी साफ किया कि उनसे इस ज्वाइनिंग पर कोई राय नहीं मांगी गई थी, इसलिए विरोध का सवाल ही नहीं उठता।
4. 28 मार्च को कौन-कौन हुए शामिल?
विरोध के बावजूद कांग्रेस ने दिल्ली में 6 कद्दावर नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई:
* राजकुमार ठुकराल
* नारायण पाल
* भीमलाल आर्या
* अनुज गुप्ता
* गौरव गोयल
* लाखन सिंह नेगी
5. विश्लेषकों की राय: किसे होगा नफा-नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषक विनोद पपनै के अनुसार, हरीश रावत का यह कदम कोई संयोग नहीं बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। कांग्रेस के भीतर का यह ध्रुवीकरण आने वाले समय में पार्टी को कमजोर कर सकता है। अगर हाईकमान ने जल्द ही हस्तक्षेप नहीं किया, तो इस गुटबाजी का सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिल सकता है।
बड़ी चुनौती: कांग्रेस के लिए इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपने कुनबे को एकजुट रखना है। एक तरफ नए नेताओं के आने से कुनबा बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ पुराने दिग्गजों की नाराजगी पार्टी की नींव हिला रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि ‘हरदा’ का यह 15 दिन का अवकाश कब और किस मोड़ पर खत्म होता है।
