ईरान ने दी होर्मुज स्ट्रेट पर ढील, पाकिस्तान को कुवैत से डीजल-जेट फ्यूल मिलेगा
ईरान ने दी होर्मुज स्ट्रेट पर ढील, पाकिस्तान को कुवैत से डीजल-जेट फ्यूल मिलेगा
ईरान-अमेरिका-इजराइल युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर जारी तनाव में ईरान ने पाकिस्तान को बड़ी राहत दी है। ईरान ने पाकिस्तानी झंडे वाले 20 अतिरिक्त जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद पाकिस्तान अब कुवैत से डीजल और जेट ईंधन आयात करने की योजना बना रहा है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक दार ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि रोजाना दो पाकिस्तानी जहाज होर्मुज से गुजर सकेंगे। ईरान की इस ‘ढील’ से पाकिस्तान के गंभीर ऊर्जा संकट को कुछ हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
क्यों जरूरी था यह समझौता?
ईरान ने मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका-इजराइल हमलों के जवाब में होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था।
इस जलडमरूमध्य से दुनिया के करीब 20% तेल निर्यात होता है। बंदी के कारण पाकिस्तान सहित कई देशों में तेल आपूर्ति बाधित हो गई थी।
पाकिस्तान पहले से ही तेल-गैस संकट का सामना कर रहा था। अब ईरान की मंजूरी के बाद पाकिस्तानी जहाज कुवैत से डीजल और जेट फ्यूल ला सकेंगे।
कुवैत के साथ हाल ही में हुई बैठक में पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ने यह प्रस्ताव रखा, जिस पर कुवैत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। पाकिस्तानी जहाज अब कुवैत से तेल उत्पाद लोड करके होर्मुज के रास्ते कराची पहुंचा सकेंगे।
ईरान की रणनीति
ईरान ने ‘दोस्ताना’ या ‘गैर-शत्रुतापूर्ण’ देशों (जैसे चीन, भारत, पाकिस्तान, रूस आदि) के जहाजों को चुनिंदा आधार पर अनुमति देना शुरू कर दिया है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि ईरान प्रति टैंकर मोटी फीस (लगभग 20 लाख डॉलर तक) भी वसूल रहा है। वहीं, अमेरिका और इजराइल से जुड़े जहाजों पर सख्ती बरती जा रही है।
पाकिस्तान इस पूरे मामले में दोनों तरफ संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। एक तरफ ईरान को ‘सॉलिडैरिटी’ दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ कुवैत (गल्फ देश) से तेल लेने की तैयारी कर रहा है।
असर क्या होगा?
पाकिस्तान को तेल संकट से थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी समस्या अभी दूर नहीं हुई है।
वैश्विक तेल कीमतें पहले ही काफी बढ़ चुकी हैं। होर्मुज की स्थिति पर निर्भर करता है कि आगे क्या होता है।
कुवैत समेत गल्फ देश भी इस बंदी से बुरी तरह प्रभावित हैं और उन्होंने इसे ‘आर्थिक नाकाबंदी’ बताया है।
यह विकास ईरान के होर्मुज पर नियंत्रण की रणनीति को दिखाता है, जहां वह चुनिंदा देशों को फायदा पहुंचाकर कूटनीतिक दबाव बनाए रख रहा है।
