उत्तराखंड

उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान-2025: डॉ. जितेन ठाकुर को ‘साहित्य भूषण’, सीएम धामी ने साहित्यकारों को सराहा

उत्तराखंड की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देने के उद्देश्य से देहरादून में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के दिग्गज साहित्यकारों को उनकी साधना और उत्कृष्ट सृजन के लिए सम्मानित किया।

उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान-2025: डॉ. जितेन ठाकुर को ‘साहित्य भूषण’, सीएम धामी ने साहित्यकारों को सराहा

देहरादून, 30 मार्च 2026: उत्तराखंड भाषा संस्थान द्वारा मुख्यमंत्री आवास स्थित ‘मुख्य सेवक सदन’ में उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025 का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मानों से लेखकों और कवियों को नवाजा। मुख्यमंत्री ने साहित्यकारों को समाज का मार्गदर्शक बताते हुए राज्य में ‘साहित्य ग्राम’ बनाने जैसी बड़ी घोषणाएं भी कीं।

सम्मानों की सूची: किन्हें मिला कौन सा पुरस्कार?

समारोह में विभिन्न श्रेणियों में साहित्यकारों को उनकी जीवनपर्यंत सेवा और विशिष्ट विधाओं के लिए सम्मानित किया गया:

| सम्मान का नाम | सम्मानित साहित्यकार |

| उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान (सर्वोच्च) | डॉ. जितेन ठाकुर |

| दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार | डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी |

| साहित्य नारी वंदन सम्मान | प्रो. दिवा भट्ट |

| उत्तराखंड मौलिक रचना पुरस्कार | डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान, शीशपाल गुसाई |

| उत्कृष्ट बाल साहित्य पुरस्कार | प्रो. दिनेश चमोला |

| उत्कृष्ट कुमाऊंनी व गढ़वाली साहित्य | तारा पाठक, हेमंत सिंह बिष्ट और गजेंद्र नौटियाल |

मुख्यमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें

* साहित्य जगत के प्रेरणा स्रोत: सीएम धामी ने कहा कि डॉ. जितेन ठाकुर जैसे साहित्यकार न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी जगत के लिए प्रेरणा हैं।

* साहित्य समाज का दर्पण: उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’ और शैलेश मटियानी जैसी महान विभूतियों को याद करते हुए कहा कि लेखक केवल शब्दों के निर्माता नहीं, बल्कि समाज के दिशा-निर्देशक होते हैं।

* स्वतंत्रता और राज्य निर्माण: सीएम ने याद दिलाया कि उत्तराखंड राज्य निर्माण और देश के स्वतंत्रता आंदोलन में साहित्यकारों की भूमिका अमूल्य रही है।

सरकार की नई पहल: ‘साहित्य ग्राम’ की स्थापना

साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री ने दो महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं:

* साहित्य ग्राम (Literature Villages): राज्य में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित किए जा रहे हैं, जहाँ साहित्यकारों को लेखन और सृजन के लिए सभी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

* साहित्यिक पर्यटन: उत्तराखंड को ‘साहित्यिक पर्यटन’ के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे दुनिया भर के पाठक और लेखक यहाँ की संस्कृति से जुड़ सकें।

* अनुदान योजना: सरकार लेखकों को उनके ग्रंथों के प्रकाशन के लिए वित्तीय सहायता (Grant) भी प्रदान कर रही है।

सांस्कृतिक जड़ों की ओर वापसी

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का जिक्र करते हुए कहा कि देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। उन्होंने राज्य के रचनाकारों से आह्वान किया कि वे अपनी कलम के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने का कार्य जारी रखें।

निष्कर्ष: यह समारोह उत्तराखंड की समृद्ध भाषाई विविधता और रचनात्मक चेतना को समर्पित रहा, जहाँ गढ़वाली, कुमाऊंनी और हिंदी साहित्य का अद्भुत संगम देखने को मिला।

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