उत्तराखंड: मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को मिली रफ्तार, 37.42 लाख रुपए का बजट जारी
उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और अनुसंधान को नई ऊंचाई देने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना’ के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट को मंजूरी दे दी गई है, जिससे राज्य के मेधावी शोधार्थियों और प्राध्यापकों को अपने प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
उत्तराखंड: मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना को मिली रफ्तार, 37.42 लाख रुपए का बजट जारी
देहरादून, 30 मार्च 2026: उत्तराखंड सरकार ने राज्य के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शोध (Research) संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा शोध प्रोत्साहन योजना’ के संचालन हेतु वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। उच्च शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत कुमार सिन्हा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कुल 37,42,454 रुपए की धनराशि को मंजूरी दी गई है।
बजट का विवरण: कहाँ खर्च होंगे पैसे?
स्वीकृत की गई कुल राशि को दो मुख्य भागों में बांटा गया है:
* शोध परियोजनाओं के लिए: चयनित 9 नए शोध प्रस्तावों की पहली किश्त के रूप में 35,49,954 रुपए जारी किए गए हैं।
* विशेषज्ञों का मानदेय: शोध प्रस्तावों का मूल्यांकन करने वाले 40 विषय विशेषज्ञों के मानदेय के लिए 1,92,500 रुपए स्वीकृत किए गए हैं।
इन 9 शोध प्रस्तावों को मिली वित्तीय मंजूरी
विभिन्न विषयों में शोध के लिए निम्नलिखित विशेषज्ञों के प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति दी गई है:
| शोधार्थी/प्राध्यापक का नाम | विषय | स्वीकृत कुल शोध राशि |
| डॉ. सोनी तिलारा | गृह विज्ञान | ₹10,00,000 |
| प्रो. हरीश बिष्ट | जंतु विज्ञान | ₹9,16,783 |
| डॉ. तनुजा विष्ट | रसायन विज्ञान | ₹8,55,750 |
| डॉ. एलबा मंडरेला | अंग्रेजी | ₹8,45,625 |
| डॉ. गिरीश बिष्ट | रसायन विज्ञान | ₹8,00,000 |
| डॉ. वर्षा रानी | भौतिक विज्ञान | ₹8,00,000 |
| डॉ. नीरजा सिंह | सामाजिक कार्य | ₹8,00,000 |
| डॉ. करुणा शर्मा | मीडिया एंड कम्युनिकेशन | ₹6,51,250 |
| डॉ. शिप्रा पंत | संगीत | ₹4,30,500 |
धनराशि के उपयोग हेतु कड़े निर्देश
सरकार ने बजट के दुरुपयोग को रोकने के लिए स्पष्ट गाइडलाइन्स जारी की हैं:
* कार्य आधारित व्यय: धनराशि केवल उसी कार्य के लिए खर्च की जाएगी जिसके लिए वह स्वीकृत हुई है। इसे किसी दूसरे मद (Head) में ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।
* मितव्ययता: बजट का आहरण और व्यय नियमानुसार और आवश्यकता के अनुरूप ही किया जाएगा। अतिरिक्त बजट की उम्मीद में स्वीकृत राशि से अधिक खर्च करने पर पाबंदी है।
* निगरानी: व्यय का मासिक विवरण नियमित रूप से शासन को भेजा जाएगा और विभागाध्यक्ष द्वारा इसकी सूचना महालेखाकार व वित्त विभाग को दी जाएगी।
किसे मिलेगा लाभ?
यह योजना राजकीय महाविद्यालयों और राज्य विश्वविद्यालय परिसरों में कार्यरत नियमित प्राध्यापकों और वहां नियमित रूप से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के लिए है। चयन एवं मूल्यांकन समिति की संस्तुति के बाद, उच्च शिक्षा निदेशक के माध्यम से पात्र शोधार्थियों को डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए पैसा भेजा जाएगा।
निष्कर्ष: मुख्यमंत्री की यह पहल उत्तराखंड को ‘नॉलेज हब’ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। रसायन विज्ञान से लेकर संगीत और मीडिया तक के विषयों को शामिल करना शिक्षा के प्रति एक समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाता है।
