राजनीति

‘अपने गिरेबान में झांककर देखिए…’, नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस पर बरसे अमित शाह

‘अपने गिरेबान में झांककर देखिए…’, नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस पर बरसे अमित शाह

नई दिल्ली, 30 मार्च 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नक्सलवाद (वामपंथी उग्रवाद) पर चर्चा के दौरान कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद वामपंथी विचारधारा की उपज है और कांग्रेस ने लंबे समय तक आदिवासियों को विकास से वंचित रखा। शाह ने विपक्ष से पूछा, “अपने गिरेबान में झांककर देखिए… दोषी कौन है?”

लोकसभा में नक्सल मुक्त भारत पर बहस का जवाब देते हुए अमित शाह ने दावा किया कि देश अब नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है, खासकर बस्तर क्षेत्र में लाल आतंक लगभग समाप्त हो गया है। उन्होंने बताया कि मोदी सरकार ने बस्तर के हर गांव में स्कूल, राशन दुकानें और विकास कार्य पहुंचाए हैं।

अमित शाह के प्रमुख बयान

“60 साल आपने राज किया, आदिवासियों को घर नहीं दिया, पानी नहीं दिया, स्कूल नहीं बनाए, बैंक नहीं पहुंचाया… अब हिसाब मांग रहे हो? पहले अपने गिरेबान में झांककर देखो कि दोषी कौन है।”

नक्सलवाद को इंदिरा गांधी के समय की वामपंथी विचारधारा से जोड़ा और कहा कि कांग्रेस ने इसे बढ़ावा दिया।

“गोली का जवाब गोली से मिलेगा” — नक्सलियों को चेतावनी देते हुए कहा कि हथियार डाल दें, वरना सख्त कार्रवाई होगी।

उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे नक्सलियों की वकालत करते हैं और भगत सिंह, बिरसा मुंडा जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की तुलना नक्सलियों से करते हैं।

अमित शाह ने यह भी कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों से युवाओं को मुख्यधारा में लाया जा रहा है और सुरक्षा बलों की कार्रवाइयों से नक्सलवाद अपनी आखिरी सांसें ले रहा है।

पृष्ठभूमि

यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। अमित शाह ने पहले भी कई मौकों पर इस डेडलाइन का जिक्र किया है। उन्होंने कांग्रेस शासन के 60 सालों को आदिवासी क्षेत्रों में विकास की अनदेखी के लिए जिम्मेदार ठहराया।

कांग्रेस और विपक्षी दलों ने शाह के बयान को राजनीतिक हमला बताया है, जबकि भाजपा सांसदों ने इसे ऐतिहासिक और तथ्यों पर आधारित बताया।

यह बहस नक्सलवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की निर्णायक लड़ाई और विकास मॉडल को रेखांकित करती है। बस्तर जैसे क्षेत्रों में अब स्कूल, सड़कें और बुनियादी सुविधाएं पहुंचने से स्थानीय लोग मुख्यधारा में आ रहे हैं।

अमित शाह का यह आक्रामक तेवर एक बार फिर केंद्र और विपक्ष के बीच नक्सलवाद के मुद्दे पर सियासी घमासान को उजागर करता है।

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