चीन पर डिजिटल स्ट्राइक: Hikvision और TP-Link जैसे CCTV कैमरों पर ‘बैन’!
भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा चोरी की चिंताओं को देखते हुए चीनी मूल के CCTV कैमरों और उनके उपकरणों पर अब तक का सबसे बड़ा कड़ा प्रहार किया है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए नियमों ने Hikvision, Dahua और TP-Link जैसे बड़े ब्रांडों के लिए भारतीय बाजार के दरवाजे लगभग बंद कर दिए हैं।
चीन पर डिजिटल स्ट्राइक: 1 अप्रैल से Hikvision और TP-Link जैसे CCTV कैमरों पर ‘बैन’!
नई दिल्ली, 30 मार्च 2026: भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के नए STQC (Standardisation Testing and Quality Certification) नियमों के तहत, अब चीनी चिपसेट (Chipset) वाले इंटरनेट-कनेक्टेड CCTV कैमरों की बिक्री पर प्रभावी रूप से रोक लगा दी गई है।
क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?
* डेटा जासूसी का खतरा: सुरक्षा एजेंसियों को आशंका थी कि चीनी कैमरों में ‘बैकडोर’ (Backdoors) हो सकते हैं, जिनके जरिए भारत का संवेदनशील डेटा विदेशी सर्वरों (विशेषकर चीन) को भेजा जा सकता है।
* रिमोट एक्सेस: सरकारी जांच में पाया गया कि कई कैमरों में ऐसी खामियां थीं जिनका फायदा उठाकर हैकर्स दूर बैठकर भी लाइव फीड देख सकते थे।
* कड़े सर्टिफिकेशन नियम: 1 अप्रैल 2026 से केवल उन्हीं कैमरों को बेचने की अनुमति होगी जिनके पास STQC सर्टिफिकेट होगा। सरकार ने चीनी कंपनियों और चीनी प्रोसेसर का उपयोग करने वाले किसी भी ब्रांड को यह सर्टिफिकेट देने से मना कर दिया है।
कौन-कौन से ब्रांड्स पर होगा असर?
* प्रमुख कंपनियां: Hikvision (हिकविजन), Dahua (दहुआ), और TP-Link (टीपी-लिंक) जैसे ब्रांड्स अब भारत में अपने ‘स्मार्ट’ या ‘इंटरनेट’ कैमरे नहीं बेच पाएंगे।
* स्मार्टफोन ब्रांड्स: शाओमी (Xiaomi) और रियलमी (Realme) जैसे ब्रांड्स, जो पहले होम सिक्योरिटी कैमरे बेचते थे, उन्होंने भी इस कैटेगरी से हाथ खींच लिए हैं क्योंकि वे नए सुरक्षा मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।
* बड़ी गिरावट: डहुआ (Dahua) का कारोबार भारत में पहले ही 80% तक गिर चुका है, और वे अब केवल पुराने ‘एनालॉग’ कैमरे बेचने तक सीमित रह गए हैं।
भारतीय बाजार में आया बड़ा बदलाव
चीनी कंपनियों के बाहर होने से भारतीय कंपनियों के लिए रास्ते खुल गए हैं।
* देसी ब्रांड्स का दबदबा: CP Plus, Qubo, Prama, Matrix और Sparsh जैसे भारतीय ब्रांड्स ने अब मार्केट के 80% हिस्से पर कब्जा कर लिया है।
* सप्लाई चेन में बदलाव: इन भारतीय कंपनियों ने चीनी चिपसेट का इस्तेमाल बंद कर दिया है और अब वे ताइवान (Taiwan) या अमेरिका से आने वाली चिप्स और खुद के बनाए सॉफ्टवेयर (Firmware) का इस्तेमाल कर रही हैं।
आम ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?
* पुराने कैमरों का क्या? अगर आपके घर या ऑफिस में पहले से चीनी कैमरा लगा है, तो वह चलता रहेगा। सरकार ने वर्तमान में लगे कैमरों को हटाने का आदेश नहीं दिया है, लेकिन नए इंस्टॉलेशन के लिए ये उपलब्ध नहीं होंगे।
* कीमतों में उछाल: चूंकि ताइवानी और अमेरिकी चिप्स चीनी चिप्स के मुकाबले 15-20% महंगी हैं, इसलिए आने वाले समय में प्रीमियम क्वालिटी के कैमरों की कीमतें थोड़ी बढ़ सकती हैं।
विशेष नोट: सरकार ने सरकारी विभागों को पहले ही सख्त निर्देश दिए हैं कि वे केवल प्रमाणित (Certified) कंपनियों से ही सर्विलांस सिस्टम खरीदें। चीन ने भारत के इस फैसले को “भेदभावपूर्ण” बताते हुए विरोध दर्ज कराया है।
