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54 साल बाद चांद की ओर मानवीय उड़ान: ‘आर्टेमिस II’ मिशन के लिए काउंटडाउन शुरू

54 साल पहले अपोलो 17 के जरिए इंसान ने आखिरी बार चांद पर कदम रखा था। अब नासा का आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन उस इतिहास को दोहराने और भविष्य की नींव रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

54 साल बाद चांद की ओर मानवीय उड़ान: ‘आर्टेमिस II’ मिशन के लिए काउंटडाउन शुरू

फ्लोरिडा, 30 मार्च 2026: अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नासा (NASA) अपने महत्वाकांक्षी आर्टेमिस प्रोग्राम के तहत 1 अप्रैल 2026 को ‘आर्टेमिस II’ लॉन्च करने के लिए तैयार है। यह 1972 के बाद पहला ऐसा मिशन होगा जिसमें इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) को छोड़कर चंद्रमा के करीब जाएंगे।

मिशन की मुख्य विशेषताएं

* लॉन्च की तारीख: 1 अप्रैल 2026 (भारतीय समयानुसार देर रात)।

* रॉकेट: दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट SLS (Space Launch System)।

* अवधि: लगभग 10 दिनों का सफर।

* दूरी: चंद्रमा के ‘फॉर साइड’ (पीछे वाले हिस्से) से करीब 7,600 किमी दूर तक की उड़ान, जो अपोलो मिशनों से भी अधिक दूरी होगी।

इतिहास रचने वाली चौकड़ी (The Crew)

इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जो अपने आप में कई रिकॉर्ड तोड़ेंगे:

* रीड वाइसमैन (Commander): मिशन का नेतृत्व करेंगे।

* विक्टर ग्लोवर (Pilot): चांद पर जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनेंगे।

* क्रिस्टीना कोच (Mission Specialist): चंद्रमा के मिशन पर जाने वाली पहली महिला।

* जेरेमी हेंसन (Mission Specialist): कनाडा के अंतरिक्ष यात्री, जो चांद की यात्रा करने वाले पहले गैर-अमेरिकी बनेंगे।

मिशन का उद्देश्य: सिर्फ घूमना नहीं, परखना है

यह एक ‘लूनर फ्लाईबाई’ (Lunar Flyby) मिशन है। इसका मतलब है कि अंतरिक्ष यात्री चांद की सतह पर उतरेंगे नहीं, बल्कि उसके चारों ओर चक्कर लगाकर वापस आएंगे।

* ओरियन कैप्सूल की टेस्टिंग: यह पहली बार होगा जब ‘ओरियन’ अंतरिक्ष यान में इंसान सवार होंगे। इसके लाइफ सपोर्ट सिस्टम और नेविगेशन की जांच की जाएगी।

* लेजर कम्युनिकेशन: पहली बार अंतरिक्ष से हाई-स्पीड डेटा भेजने के लिए लेजर तकनीक का परीक्षण होगा।

* 2028 की तैयारी: यह मिशन 2028 में होने वाली ‘आर्टेमिस III’ लैंडिंग के लिए रास्ता साफ करेगा, जिसमें इंसान फिर से चांद की मिट्टी पर कदम रखेगा।

विशेष नोट: इस मिशन की सफलता न केवल मंगल (Mars) पर जाने का रास्ता खोलेगी, बल्कि चांद पर एक स्थायी बेस बनाने के सपने को भी सच करेगी।

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