उत्तराखंड

उत्तराखंड में पीएनजी क्रांति: अप्रैल तक 1.5 लाख घरों में पहुंचेगी पाइपलाइन गैस, चारधाम रूट पर ‘कलस्टर’ मॉडल से मिलेगी राहत

उत्तराखंड में पीएनजी क्रांति: अप्रैल तक 1.5 लाख घरों में पहुंचेगी पाइपलाइन गैस, चारधाम रूट पर ‘कलस्टर’ मॉडल से मिलेगी राहत

देहरादून: ईरान-इजरायल युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ईंधन और एलपीजी (LPG) सप्लाई में आई बाधाओं को देखते हुए भारत सरकार ने अब ‘पाइप नेचुरल गैस’ (PNG) को मिशन मोड पर बढ़ावा देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में उत्तराखंड शासन ने राज्य के हर घर तक पीएनजी पहुंचाने के लिए कमर कस ली है। खाद्य आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि आगामी अप्रैल 2026 तक प्रदेश में पीएनजी कनेक्शन धारकों की संख्या डेढ़ लाख के पार पहुंचा दी जाएगी।

उत्तराखंड में सक्रिय हैं ये 5 दिग्गज कंपनियां

प्रदेश में गैस पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन देने का जिम्मा पांच बड़ी कंपनियों को सौंपा गया है, जिन्हें शासन की ओर से सभी जरूरी अनुमतियां (Permissions) दी जा चुकी हैं:

* गेल गैस लिमिटेड (GAIL Gas Limited)

* एचएनजीपीएल (Haridwar Natural Gas Private Limited)

* आईओएजीपीएल (Indian Oil- Adani Gas Private Limited)

* एचपीसीएल (Hindustan Petroleum Corporation Limited)

* गैसोनेट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड

पर्वतीय क्षेत्रों और चारधाम यात्रा के लिए खास ‘कलस्टर’ प्लान

खाद्य आपूर्ति सचिव आनंद स्वरूप ने बताया कि दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों, खासकर चारधाम यात्रा मार्ग पर पाइपलाइन बिछाना एक चुनौती है। इसके समाधान के लिए सरकार ‘कलस्टर आधारित मॉडल’ पर काम कर रही है।

* क्या है कलस्टर मॉडल? इसमें पूरी लंबी पाइपलाइन बिछाने के बजाय एक निश्चित क्षेत्र (Cluster) में गैस स्टोरेज बनाकर वहां के घरों और संस्थानों को कनेक्शन दिए जाएंगे। इससे एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भरता कम होगी और सप्लाई चेन सुगम बनेगी।

सड़कों के गड्ढों पर सरकार का सख्त रुख

पीएनजी विस्तार में आ रही सबसे बड़ी बाधा सड़क खुदाई को लेकर थी। कंपनियां चाहती थीं कि पाइपलाइन बिछाने के बाद गड्ढों को भरने का खर्च संबंधित सरकारी विभाग उठाए।

सचिव आनंद स्वरूप का कड़ा निर्देश: “उत्तराखंड इतना अमीर राज्य नहीं है कि कंपनियों की खुदाई का खर्च वहन करे। कंपनियों को साफ कह दिया गया है कि अगर वे सड़क खोदती हैं, तो उन्हें मरम्मत के लिए पैसा जमा करना होगा।”

क्यों जरूरी है पीएनजी?

* आत्मनिर्भरता: भारत अपनी जरूरत की 30 से 35 प्रतिशत गैस खुद पैदा करता है। पीएनजी के इस्तेमाल से आयातित एलपीजी पर लोड कम होगा।

* सस्ती और सुरक्षित: पीएनजी, एलपीजी के मुकाबले सस्ती पड़ती है और इसमें सिलेंडर फटने या खत्म होने का डर नहीं रहता।

* रुकी हुई सप्लाई होगी शुरू: देहरादून समेत जिन इलाकों में पाइपलाइन बिछ चुकी है लेकिन सप्लाई शुरू नहीं हुई, वहां कंपनियों को जल्द से जल्द कनेक्शन एक्टिव करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य लक्ष्य: सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे पीएनजी का दायरा बढ़ेगा, घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत पूरी तरह खत्म हो जाएगी और आम जनता को अंतरराष्ट्रीय युद्ध जैसी स्थितियों में भी निर्बाध ईंधन मिलता रहेगा।

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