राजनीति

जेवर एयरपोर्ट का ‘क्रेडिट वॉर’: अखिलेश यादव के दावों के बाद अब मायावती ने ठोकी दावेदारी, छिड़ी सियासी जंग

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के प्रथम चरण के उद्घाटन के साथ उत्तर प्रदेश की राजनीति में श्रेय लेने की होड़ तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 28 मार्च 2026 को उद्घाटन किए जाने के बाद पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया, अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने मोर्चा संभाल लिया है।

मायावती ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जेवर एयरपोर्ट की रूपरेखा और सभी जरूरी बुनियादी कार्य उनके BSP शासनकाल (2007-2012) में ही शुरू हो गए थे। उन्होंने कहा, “काफी लंबे इंतजार के बाद जेवर में नोएडा इंटरनेशनल हवाई अड्डा के प्रथम चरण का कल उद्घाटन हुआ, जबकि इसकी रूपरेखा ही नहीं बल्कि इसके सभी जरूरी बुनियादी कार्य बीएसपी की सरकार में किए गए थे।”

अखिलेश यादव का दावा

अखिलेश यादव ने पहले दावा किया था कि जेवर एयरपोर्ट का विचार पुराना है और मायावती इसे बनाना चाहती थीं, लेकिन कुछ कारणों से रुक गया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी सरकार के समय फिरोजाबाद में प्रस्तावित इंटरनेशनल एयरपोर्ट को केंद्र की भाजपा सरकार ने अनुमति दे दी होती, तो विकास की गति और तेज होती। अखिलेश ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए कई नए एयरपोर्ट्स बंद पड़े होने का भी आरोप लगाया।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

BSP का पक्ष: मायावती का दावा है कि जेवर में ताज इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एविएशन हब की योजना उनकी सरकार ने तैयार की थी। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि UPA सरकार ने अड़ंगा लगाया।

SP का पक्ष: अखिलेश यादव ने अपनी सरकार के दौरान जेवर प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की बात कही, लेकिन पहले कुछ समय में उन्होंने मायावती के जेवर प्रोजेक्ट को रद्द भी किया था (2012 में)।

बीजेपी का जवाब: पीएम मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन मौके पर कहा कि पिछले दशकों में SP और BSP सरकारों ने प्रोजेक्ट को लटकाया या रोका। मोदी ने यहां तक कहा कि पहले नोएडा को “ATM for loot” बना दिया गया था।

जेवर एयरपोर्ट एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट में से एक होगा, जिसका पहला फेज अब शुरू हो गया है। यह NCR का दूसरा बड़ा एयरपोर्ट बनेगा और उत्तर प्रदेश के विकास, रोजगार तथा कनेक्टिविटी को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

श्रेय की जंग क्यों?

उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच विकास परियोजनाओं का क्रेडिट लेने की यह पुरानी परंपरा है। जेवर एयरपोर्ट की नींव 2000 के दशक में पड़ी थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और केंद्र-राज्य समन्वय की कमी से यह सालों तक लटका रहा। अब उद्घाटन के मौके पर सभी दल इसे अपनी “सोच” और “योजना” बताने की कोशिश कर रहे हैं।

यह विवाद दिखाता है कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी यूपी की सियासत कितनी गर्म रहती है। आम जनता को उम्मीद है कि राजनीतिक बयानबाजी के बीच एयरपोर्ट जल्दी से पूरा हो और क्षेत्र को असली लाभ मिले।

क्या कहते हैं आप? जेवर एयरपोर्ट का असली श्रेय किसे जाता है? टिप्पणी में जरूर बताएं।

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