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‘मानसिक विक्षिप्त महिला के गर्भपात का फैसला, कोर्ट से मांगी जाएगी इजाजत’

‘मानसिक विक्षिप्त महिला के गर्भपात का फैसला, कोर्ट से मांगी जाएगी इजाजत’

एटा (उत्तर प्रदेश): सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी में भर्ती एक 35 वर्षीय मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला के गर्भपात को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। महिला से कथित तौर पर रेप हुआ था और वह गर्भवती है। अस्पताल प्रशासन ने गर्भपात कराने के लिए कोर्ट से इजाजत मांगने का फैसला किया है।

यह मामला सैफई स्थित उत्तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज (सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी) में सामने आया। महिला वर्तमान में अस्पताल के मानसिक रोग वार्ड में उपचार करा रही है। पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया है और जांच चल रही है।

मामला क्या है?

महिला मानसिक रूप से विक्षिप्त (mentally ill) बताई जा रही है।

उससे कथित बलात्कार हुआ, जिसके कारण वह गर्भवती हो गई।

गर्भावस्था की अवधि के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं आई, लेकिन चूंकि महिला मानसिक रूप से अक्षम है, इसलिए MTP Act (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट) के तहत अभिभावक/गार्जियन की सहमति या कोर्ट की अनुमति जरूरी हो सकती है।

अस्पताल ने सीधे गर्भपात नहीं करने का फैसला लिया और कोर्ट से इजाजत मांगने का प्रस्ताव रखा है ताकि कानूनी प्रक्रिया का पालन हो सके।

कानूनी पहलू

भारतीय कानून (MTP Act, 1971 और 2021 संशोधन) के अनुसार:

मानसिक रूप से बीमार महिला के मामले में गर्भपात के लिए अक्सर गार्जियन की सहमति या कोर्ट की मंजूरी ली जाती है, खासकर जब महिला खुद सहमति देने की स्थिति में न हो।

सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में महिला की शारीरिक स्वायत्तता और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन गंभीर मानसिक विकार की स्थिति में कोर्ट हस्तक्षेप करता है।

रेप सर्वाइवर होने पर गर्भपात की अनुमति आसानी से मिल सकती है, लेकिन महिला की मानसिक स्थिति को देखते हुए कोर्ट मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट और महिला के हित को ध्यान में रखकर फैसला लेगा।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि कानूनी जटिलताओं से बचने और महिला के अधिकारों की रक्षा के लिए कोर्ट की मंजूरी लेना उचित होगा। पुलिस ने महिला के स्वास्थ्य की स्थिति और रेप की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

यह मामला संवेदनशील है और महिला की मानसिक स्थिति, गर्भावस्था की अवधि तथा चिकित्सकीय रिपोर्ट पर निर्भर करेगा कि कोर्ट क्या फैसला देता है। फैंस और सामाजिक संगठन महिला के स्वास्थ्य और न्याय की मांग कर रहे हैं।

नोट: यह विवादास्पद और संवेदनशील मुद्दा है। फैसला कोर्ट द्वारा लिया जाएगा, जिसमें महिला की भलाई को सर्वोपरि रखा जाएगा।

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