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पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान भड़की हिंसा: जमकर पथराव, कई घायल, पुलिस ने काबू में की स्थिति

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में रामनवमी शोभायात्रा के दौरान भड़की हिंसा: जमकर पथराव, कई घायल, पुलिस ने काबू में किया स्थिति

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान शुक्रवार को हिंसा भड़क उठी। जंगीपुर अनुमंडल के रघुनाथगंज इलाके में दो समुदायों के बीच झड़प हो गई, जिसमें उपद्रवियों ने शोभायात्रा पर जमकर पथराव किया। कई लोग घायल हो गए, दुकानों में तोड़फोड़ हुई और इलाके में तनाव फैल गया।

पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और भारी बल तैनात कर दिया। इलाके की दुकानें तुरंत बंद कर दी गईं।

घटना का विवरण

रामनवमी की शोभायात्रा निकालते समय कुछ जगहों से पत्थर और ईंटें फेंकी गईं।

हिंसा के बाद इलाके में आगजनी और तोड़फोड़ की भी घटनाएं बताई गईं।

घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, हालांकि अभी तक हताहतों की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस के अनुसार, हालात काबू में हैं और अतिरिक्त फोर्स (केंद्रीय बलों सहित) तैनात की गई है।

मुर्शिदाबाद मुस्लिम बहुल क्षेत्र है और पिछले वर्षों में भी रामनवमी के दौरान यहां हिंसा की घटनाएं हो चुकी हैं। इस बार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच यह घटना ज्यादा संवेदनशील मानी जा रही है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

बीजेपी ने इस घटना को लेकर ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि शोभायात्रा पर हमला “योजनाबद्ध” था और पुलिस की निष्क्रियता जिम्मेदार है। बीजेपी नेताओं ने कहा कि रामभक्तों पर हमले की परंपरा बंगाल में जारी है।

टीएमसी की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पुलिस ने कहा कि दोनों पक्षों से लोगों को हिरासत में लिया गया है और जांच चल रही है।

प्रशासनिक कार्रवाई

पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी तैनाती की है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें और शांति बनाए रखें। पूरे पश्चिम बंगाल में रामनवमी की अन्य शोभायात्राएं शांतिपूर्ण रही, लेकिन मुर्शिदाबाद की यह घटना राज्य में सांप्रदायिक तनाव को फिर से उजागर कर रही है।

नोट: स्थिति अभी भी संवेदनशील है और पुलिस जांच में जुटी हुई है। घायलों की संख्या और आगे की घटनाक्रम में बदलाव संभव है। लोग सोशल मीडिया पर अफवाहों से बचें और आधिकारिक सूत्रों (पुलिस/प्रशासन) पर भरोसा करें।

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