West Bengal Election 2026: बंगाल के चुनावी घमासान में मुस्लिम वोट किसके साथ जाएगा? TMC की दीवार में दरार या BJP को फायदा?
West Bengal Election 2026: बंगाल के चुनावी घमासान में मुस्लिम वोट किसके साथ जाएगा? TMC की दीवार में दरार या BJP को फायदा?
कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल 2026 को दो चरणों में होंगे, वोटों की गिनती 4 मई को होगी। 294 सीटों वाले इस घमासान में मुस्लिम वोट बैंक (लगभग 27-30% आबादी) निर्णायक भूमिका निभा सकता है। 2021 में TMC ने मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में भारी जीत हासिल की थी, लेकिन 2026 में स्थिति बदलती दिख रही है।
मुस्लिम वोट का महत्व
राज्य में मुस्लिम आबादी करीब 27% है (2011 सेंसस के आधार पर)।
85 मुस्लिम-बहुल सीटें (मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम, दक्षिण 24 परगना आदि) जहां मुस्लिम वोट 35-66% तक है।
25% से ज्यादा मुस्लिम आबादी वाली सीटें करीब 110-120 तक पहुंच सकती हैं।
2021 में TMC ने इनमें से 75 सीटें जीतीं। मुस्लिम वोट का भारी समर्थन TMC को 213 सीटों की भारी जीत दिलाने में अहम रहा।
TMC की मजबूती और चुनौतियां
ममता बनर्जी की त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) ने 2011 से मुस्लिम वोट को मजबूती से अपने साथ रखा है।
लाभ: लक्ष्मीर भंडार जैसी महिला केंद्रित योजनाएं, अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रम और BJP के खिलाफ “धर्मनिरपेक्षता” का नारा।
नुकसान: भ्रष्टाचार के आरोप, 15 साल की सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency), कुछ इलाकों में विकास की शिकायतें और युवा मुस्लिमों में नाराजगी।
नई चुनौतियां: वोट बंटने का खतरा
इस बार मुस्लिम वोट बैंक में बंटवारे की आशंका बढ़ गई है:
AIMIM + AJUP गठबंधन: असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और पूर्व TMC विधायक हुमायूं कबीर की Aam Janata Unnayan Party (AJUP) ने गठबंधन किया है। वे 190 सीटों पर उम्मीदवार उतारेंगे। मुर्शिदाबाद से अभियान शुरू होगा।
ओवैसी का आरोप: TMC ने मुस्लिम वोट लिया लेकिन समुदाय के लिए कुछ नहीं किया।
अन्य छोटे मुस्लिम संगठन और कांग्रेस भी इस वोट बैंक पर दावा कर रहे हैं।
ISF (Indian Secular Front) और लेफ्ट का भी प्रयास।
कांग्रेस उत्तर बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। BJP नेता सुवेंदु अधिकारी का दावा है कि मुस्लिम वोट “इस बार बंटेगा”।
BJP की रणनीति
डबल इंजन सरकार का नारा और विकास पर फोकस।
हिंदू वोट को ध्रुवीकरण (polarisation) के जरिए एकजुट करना।
मुस्लिम वोट में बंटवारा BJP के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, लेकिन मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों में BJP की पहुंच अभी सीमित है।
ओपिनियन पोल और विश्लेषण
कुछ सर्वे में TMC अभी भी आगे दिख रही है (41-42% वोट शेयर अनुमानित), BJP 35% के आसपास।
ममता बनर्जी CM पद के लिए सबसे पसंदीदा चेहरा बनी हुई हैं।
मुस्लिम समुदाय में TMC के प्रति संतुष्टि कुछ ज्यादा बताई जा रही है, लेकिन युवा और कुछ इलाकों में बदलाव के संकेत हैं।
अगर AIMIM-AJUP गठबंधन 10-15% वोट भी काट ले तो TMC को नुकसान हो सकता है, खासकर 85-90 मुस्लिम प्रभावित सीटों पर।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
2021 जैसा मजबूत ध्रुवीकरण इस बार कमजोर पड़ सकता है।
मुस्लिम मतदाता मुख्य रूप से TMC के साथ बने रहने की संभावना ज्यादा है, लेकिन वोट बंटने से कुछ सीटें BJP या अन्य के पक्ष में जा सकती हैं।
विकास, बेरोजगारी, शिक्षा और सुरक्षा जैसे मुद्दे भी वोट प्रभावित करेंगे।
निष्कर्ष: बंगाल के मुस्लिम वोट अभी भी मुख्य रूप से TMC की तरफ झुके दिख रहे हैं, लेकिन AIMIM-AJUP गठबंधन, कांग्रेस की कोशिशें और 15 साल की सत्ता विरोधी भावना से कुछ दरारें साफ नजर आ रही हैं। अंतिम फैसला 23-29 अप्रैल को मतदाता करेंगे। मुस्लिम वोट का बंटवारा इस बार चुनावी गणित को काफी हद तक बदल सकता है।
चुनावी विश्लेषण में आंकड़े और ग्राउंड रिपोर्ट्स बदल सकते हैं। पूरी तस्वीर चुनाव नतीजों के बाद ही साफ होगी।
