15 बार लूटने की कोशिश, चाबी खोने से मचा हड़कंप… पुरी के जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी? 48 साल बाद शुरू हुई गिनती
15 बार लूटने की कोशिश, चाबी खोने से मचा हड़कंप… पुरी के जगन्नाथ मंदिर रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी? 48 साल बाद शुरू हुई गिनती
पुरी: ओडिशा के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रहस्यमयी रत्न भंडार (Ratna Bhandar) को 48 साल बाद बुधवार (25 मार्च 2026) को खोला गया। दोपहर 12:09 बजे शुभ मुहूर्त में शुरू हुई इस ऐतिहासिक इन्वेंट्री प्रक्रिया में सोने-चांदी के आभूषणों की गिनती, वजन और डॉक्यूमेंटेशन हो रहा है। पहला दिन सफलतापूर्वक पूरा हुआ, जिसमें वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी और 3D मैपिंग जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
1978 की आखिरी इन्वेंट्री में क्या था?
1978 में (13 मई से 23 जुलाई तक, कुल 72 दिन चली प्रक्रिया) रत्न भंडार में दर्ज की गई मुख्य चीजें:
सोना: लगभग 128.38 किलोग्राम (कुछ रिपोर्ट्स में 149 किलो तक) वजन के 454 प्रकार के सोने के आभूषण।
चांदी: लगभग 221.53 किलोग्राम (कुछ में 184-198 किलो) वजन के 293 प्रकार के चांदी के आभूषण और बर्तन।
इसके अलावा कई बहुमूल्य रत्न और कीमती पत्थर भी मौजूद थे।
रत्न भंडार को तीन हिस्सों में बांटा गया है — चलंती भंडार (दैनिक उपयोग), बाहर रत्न भंडार और भीतर रत्न भंडार। इनमें भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के आभूषण रखे हैं। इस बार मूल्यांकन नहीं, सिर्फ वेरिफिकेशन और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। प्रक्रिया कुछ हफ्तों में पूरी होने की उम्मीद है।
चाबी खोने का पुराना हड़कंप
2018 में रत्न भंडार की चाबियां गुम होने से बड़ा विवाद छिड़ गया था। आंतरिक कक्ष की चाबियां लापता बताई गईं, जिससे सुरक्षा और खजाने की स्थिति पर सवाल उठे। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा। चाबी विवाद के कारण कई बार इन्वेंट्री टलती रही। अब सख्त SOP और उच्च स्तरीय कमिटी (जस्टिस बिस्वनाथ रथ की अगुवाई में) के तहत प्रक्रिया चल रही है। RBI अधिकारी, जेमोलॉजिस्ट और सोनार भी शामिल हैं।
15 बार लूटने की कोशिशें
रत्न भंडार पर ऐतिहासिक रूप से कई बार लूट या चोरी की कोशिशें हुई हैं। मंदिर के पुराने रिकॉर्ड और रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले सदियों में करीब 15 बार लूटने की कोशिशें दर्ज हैं। कुछ मामलों में बाहरी हमलावरों ने घुसपैठ की कोशिश की, तो कुछ में आंतरिक साजिश के आरोप लगे। भारी सुरक्षा (सीसीटीवी, पुलिस और मंदिर प्रशासन) के बावजूद इसकी कीमत करोड़ों में आंकी जाती है, जिससे लालच बढ़ता रहा।
क्यों खास है रत्न भंडार?
यह भगवान जगन्नाथ के मंदिर का सबसे सुरक्षित खजाना है, जहां सदियों से राजा-रानी, भक्तों और दानकर्ताओं द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषण रखे हैं।
आभूषणों में माणिक, मोती, हीरे और अन्य रत्न जड़े हुए हैं।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह प्रक्रिया सिर्फ दस्तावेजीकरण के लिए है, कोई नीलामी या बिक्री नहीं होगी।
सुरक्षा इंतजाम: मंदिर परिसर में सख्त सुरक्षा, सीमित लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति। श्रद्धालु सामान्य दर्शन कर सकते हैं, लेकिन रत्न भंडार वाले क्षेत्र में प्रतिबंध है।
यह प्रक्रिया जगन्नाथ संस्कृति के संरक्षण और पारदर्शिता का प्रतीक मानी जा रही है। पूरी इन्वेंट्री पूरी होने के बाद नई रिपोर्ट जारी की जाएगी।
नोट: आंकड़े 1978 की आधिकारिक इन्वेंट्री पर आधारित हैं। नई गिनती में कुछ अंतर संभव है। जांच अभी जारी है।
