ईरान-इजरायल युद्ध का बड़ा असर: फिलीपींस में नेशनल एनर्जी इमरजेंसी घोषित, महज 45 दिन का ईंधन शेष
फिलीपींस ने पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध के कारण गहराते ऊर्जा संकट को देखते हुए ‘नेशनल एनर्जी इमरजेंसी’ (राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल) की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही फिलीपींस इस संघर्ष की वजह से देशव्यापी आपातकाल घोषित करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है।
राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने मंगलवार (24 मार्च 2026) को एक विशेष कार्यकारी आदेश (Executive Order 110) पर हस्ताक्षर किए। यहाँ इस बड़े घटनाक्रम की पूरी रिपोर्ट दी गई है:
ईरान-इजरायल युद्ध का बड़ा असर: फिलीपींस में नेशनल एनर्जी इमरजेंसी घोषित, महज 45 दिन का ईंधन शेष
मनीला: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी भीषण जंग का सबसे पहला और बड़ा शिकार फिलीपींस बना है। खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने के खतरे के बीच फिलीपींस ने अपने अस्तित्व को बचाने के लिए ‘ऊर्जा आपातकाल’ लागू कर दिया है।
क्यों लेना पड़ा यह कड़ा फैसला?
* आयात पर भारी निर्भरता: फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों का लगभग 98% हिस्सा खाड़ी देशों (Gulf) से आयात करता है। युद्ध की वजह से सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है।
* ईंधन का स्टॉक कम: फिलीपींस के पास वर्तमान में केवल 45 दिनों का ईंधन भंडार बचा है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो देश का परिवहन और बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।
* कीमतों में बेतहाशा वृद्धि: पिछले एक महीने में फिलीपींस में पेट्रोल-डीजल की कीमतें दोगुनी से अधिक हो गई हैं (100 PHP/L के पार), जिससे आम जनता और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हाहाकार मचा है।
इमरजेंसी के तहत क्या कदम उठाए गए हैं? (UPLIFT फ्रेमवर्क)
राष्ट्रपति मार्कोस ने ‘UPLIFT’ (Unified Package for Livelihoods, Industry, Food, and Transport) नामक रिस्पॉन्स फ्रेमवर्क सक्रिय किया है:
* राशनिंग और भंडारण पर रोक: सरकार अब ईंधन के वितरण को नियंत्रित करेगी और तेल की जमाखोरी (Hoarding) करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
* विमानों के उड़ान पर संकट: राष्ट्रपति ने चेतावनी दी है कि जेट फ्यूल की कमी के कारण विमानों को ग्राउंड (उड़ानें रद्द) करना पड़ सकता है।
* सब्सिडी: ट्रांसपोर्ट वर्कर्स और किसानों को तत्काल वित्तीय राहत (करीब 5,000 PHP की सहायता) दी जा रही है।
* एक साल की अवधि: यह इमरजेंसी एक साल के लिए लागू की गई है, जिसे स्थिति सुधरने पर पहले भी वापस लिया जा सकता है।
दुनिया पर असर
फिलीपींस का यह कदम अन्य तेल आयातक देशों (विशेषकर एशियाई देशों) के लिए एक चेतावनी है। स्लोवेनिया और श्रीलंका जैसे देशों ने भी ईंधन की राशनिंग शुरू कर दी है, लेकिन फिलीपींस ने इसे ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ का दर्जा देकर अपनी स्थिति की गंभीरता को दुनिया के सामने रख दिया है।
राष्ट्रपति मार्कोस का बयान:
“यह घोषणा हमारे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को बचाने के लिए एक ‘निवारक हथियार’ (Precautionary tool) है। हम एक ऐसे संकट की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ बिजली और ईंधन की कमी हमारे दैनिक जीवन को ठप कर सकती है।”
