यमुनोत्री यात्रा की तैयारियों में ‘खानापूर्ति’: बर्फ हटाने के लिए फावड़े नहीं, लकड़ी के फट्टों का सहारा; विभाग पर उठे सवाल
यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने में अब एक महीने से भी कम का समय बचा है, लेकिन धरातल पर तैयारियां दावों के विपरीत नजर आ रही हैं। जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक का मुख्य पैदल मार्ग अभी भी भारी बर्फ से ढका हुआ है, जिससे चारधाम यात्रा की सुरक्षा और सुगमता पर सवालिया निशान लग गए हैं।
यमुनोत्री यात्रा की तैयारियों में ‘खानापूर्ति’: बर्फ हटाने के लिए फावड़े नहीं, लकड़ी के फट्टों का सहारा; विभाग पर उठे सवाल
उत्तरकाशी/बड़कोट: आगामी 19 अप्रैल को यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का आगाज होना है। लेकिन इस बार श्रद्धालुओं की राह आसान नहीं दिख रही। मौसम साफ होने के बावजूद जानकीचट्टी-यमुनोत्री पैदल मार्ग बर्फ की चादर से पटा पड़ा है और लोक निर्माण विभाग (PWD) की कार्यप्रणाली पर स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
संसाधनों की भारी कमी: फट्टों से हटाई जा रही बर्फ
हैरान कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें विभाग द्वारा तैनात मजदूर बर्फ हटाने के लिए फावड़े या आधुनिक उपकरणों के बजाय लकड़ी और प्लाईवुड के फट्टों का इस्तेमाल करते दिख रहे हैं।
* सुस्त रफ्तार: संसाधनों की इस कमी के कारण काम बेहद धीमी गति से चल रहा है।
* बढ़ती चिंता: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो यात्रा शुरू होने तक मार्ग सुगम नहीं हो पाएगा।
तीर्थ पुरोहितों का आक्रोश
यमुनोत्री धाम के तीर्थपुरोहित विनय उनियाल ने विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा:
“कपाट खुलने में अब गिनती के दिन बचे हैं, लेकिन विभाग केवल खानापूर्ति कर रहा है। अगर समय रहते बर्फ नहीं हटाई गई और मार्ग ठीक नहीं हुआ, तो देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। धीमी रफ्तार से अन्य विकास कार्य भी ठप पड़े हैं।”
विभागीय सफाई और आश्वासन
मामले के तूल पकड़ने के बाद लोक निर्माण विभाग, बड़कोट के अधिशासी अभियंता तरूण काम्बोज ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि:
* अगर मजदूरों के पास उपकरणों की कमी है, तो तुरंत आवश्यक टूल उपलब्ध कराए जाएंगे।
* काम में तेजी लाने के लिए मजदूरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
* यात्रा शुरू होने से पहले बर्फ हटाने और अन्य मरम्मत कार्यों को हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा।
चुनौतीपूर्ण है समय सीमा
यमुनोत्री मार्ग पर भारी बर्फबारी के बाद फिसलन और संकरे रास्तों को ठीक करना एक बड़ी चुनौती है। 19 अप्रैल की समय सीमा के भीतर मार्ग को हजारों यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाना विभाग के लिए अब ‘अग्निपरीक्षा’ जैसा है।
