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पश्चिम एशिया संकट: ‘हम पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं’, सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के सवालों पर बरसे जयशंकर

पश्चिम एशिया के गहराते संकट और भारत की कूटनीतिक भूमिका को लेकर आयोजित ‘ऑल पार्टी मीटिंग’ (सर्वदलीय बैठक) की यह रिपोर्ट बेहद अहम है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर का ‘दलाल देश’ वाला बयान और विपक्ष के सवालों पर सरकार का रुख इस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर है।

पश्चिम एशिया संकट: ‘हम पाकिस्तान की तरह दलाल देश नहीं’, सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के सवालों पर बरसे जयशंकर

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल-अमेरिका) में जारी भारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई। लगभग दो घंटे चली इस बैठक में सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी ‘बिचौलिए’ की भूमिका नहीं निभाएगा। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की पेशकश पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि “भारत, पाकिस्तान की तरह दलाल देश (Broker country) नहीं है।”

बैठक की बड़ी बातें: जयशंकर का कड़ा रुख

विपक्षी सांसदों धर्मेंद्र यादव और मुकुल वासनिक ने जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा मध्यस्थता की पेशकश और डोनाल्ड ट्रंप द्वारा उसे साझा किए जाने पर सवाल उठाया, तो सरकार ने दो टूक जवाब दिया:

* दलाली नहीं, कूटनीति: जयशंकर ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर सक्रिय है, लेकिन वह पाकिस्तान की तरह बिचौलिए की भूमिका नहीं निभाएगा।

* पुरानी आदत: सरकार ने तर्क दिया कि पाकिस्तान 1981 से ऐसी ‘दलाली’ की कोशिश करता आ रहा है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। अगर अमेरिका को पाकिस्तान का इस्तेमाल करना उपयोगी लगता है, तो भारत उसे नियंत्रित नहीं कर सकता।

* रणनीतिक खामोशी: विदेश नीति की आलोचना पर सरकार ने कहा कि कभी-कभी ‘खामोशी’ भी एक रणनीतिक हथियार होती है, लेकिन भारत लगातार संबंधित पक्षों से बातचीत कर रहा है।

ऊर्जा सुरक्षा और भारतीयों की तैयारी

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने बताया कि बैठक में विपक्ष के भ्रम दूर किए गए:

* ईंधन की आपूर्ति: होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में तनाव के बावजूद भारत ने चार जहाज सुरक्षित कर लिए हैं, ताकि गैस और पेट्रोलियम की सप्लाई बाधित न हो।

* भारतीयों की सुरक्षा: सरकार ने पश्चिम एशिया में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी दी, जिससे विपक्ष ने संतोष व्यक्त किया।

पीएम की अनुपस्थिति पर सियासी घमासान

बैठक में विपक्ष ने सरकार को घेरने की भी कोशिश की:

* कांग्रेस का आरोप: मणिकम टैगोर ने कहा कि इतिहास में हमेशा ऐसी गंभीर बैठकों का नेतृत्व प्रधानमंत्री (नेहरू से लेकर मनमोहन सिंह तक) करते आए हैं, लेकिन पीएम मोदी की अनुपस्थित ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है।

* सपा का रुख: डिंपल यादव ने कहा कि सरकार के रवैये से देश के सामने आर्थिक संकट पैदा हो सकता है, जिसके लिए पहले से तैयारी जरूरी थी।

* BJP का पलटवार: प्रह्लाद जोशी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पूछा कि क्या वे “देश के खिलाफ विपक्ष के नेता” बन गए हैं?

बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद?

* सरकार: राजनाथ सिंह (अध्यक्षता), अमित शाह, निर्मला सीतारमण, एस. जयशंकर, हरदीप पुरी और किरेन रिजीजू।

* विपक्ष: मुकुल वासनिक (कांग्रेस), धर्मेंद्र यादव (सपा), असदुद्दीन ओवैसी (AIMIM), ललन सिंह (JDU), सस्मित पात्रा (BJD) और जॉन ब्रिटास (CPM)।

नतीजा: तीखी नोकझोंक के बावजूद, अंत में विपक्ष ने आश्वासन दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संकट की इस घड़ी में वे एकजुट होकर सरकार के फैसलों का समर्थन करेंगे।

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