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गुजरात विधानसभा में UCC बिल पास: बेटियों को संपत्ति में बराबर हक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य

गुजरात विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026 का पारित होना एक ऐतिहासिक कदम है। उत्तराखंड के बाद गुजरात ऐसा करने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है।

गुजरात विधानसभा में UCC बिल पास: बेटियों को संपत्ति में बराबर हक और लिव-इन का रजिस्ट्रेशन अब अनिवार्य

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आज राज्य विधानसभा में ‘गुजरात समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक, 2026’ पेश किया, जिसे लंबी चर्चा के बाद बहुमत से पारित कर दिया गया। इस बिल के कानून बनने के बाद गुजरात में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लागू होगा।

प्रमुख प्रावधान: जो आपके जीवन पर सीधा असर डालेंगे

1. बेटियों को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार: नए कानून के तहत पैतृक संपत्ति के बंटवारे में बेटियों को बेटों के बराबर हिस्सा दिया जाएगा। यह प्रावधान सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होगा, जिससे लैंगिक समानता (Gender Equality) को बढ़ावा मिलेगा।

2. लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: * अब गुजरात में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।

* यदि कोई जोड़ा एक महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो उन्हें 3 महीने की जेल या 10,000 रुपये का जुर्माना हो सकता है।

* लिव-इन रिलेशनशिप से पैदा हुए बच्चों को कानूनी रूप से वैध माना जाएगा और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में पूरा अधिकार मिलेगा।

3. बहुविवाह (Polygamy) पर पूर्ण रोक: UCC के लागू होने के बाद राज्य में बहुविवाह पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। कोई भी व्यक्ति अपनी पहली पत्नी या पति के जीवित रहते दूसरा विवाह नहीं कर पाएगा। उल्लंघन करने पर 7 साल तक की जेल का प्रावधान है।

4. हलाला और इद्दत जैसी प्रथाओं पर पाबंदी: बिल में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ‘निकाह हलाला’ और ‘इद्दत’ जैसी प्रथाओं को अवैध घोषित किया गया है। अब तलाक के बाद महिला बिना किसी शर्त के तुरंत पुनर्विवाह कर सकेगी।

बिल की अन्य महत्वपूर्ण बातें:

| क्षेत्र | मुख्य बदलाव |

| विवाह की आयु | पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष अनिवार्य। |

| शादी का पंजीकरण | सभी धर्मों के लिए विवाह का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। |

| तलाक की प्रक्रिया | अब तलाक केवल अदालत (Court) के माध्यम से ही संभव होगा, व्यक्तिगत कानूनों के आधार पर नहीं। |

| अपवाद (Exemption) | इस कानून के दायरे से अनुसूचित जनजातियों (ST) को बाहर रखा गया है। |

मुख्यमंत्री का बयान

बिल पेश करते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, “यह कानून किसी की धार्मिक मान्यताओं को छीनने के लिए नहीं, बल्कि समाज में समानता लाने और विशेष रूप से महिलाओं और बेटियों को उनके अधिकार दिलाने के लिए है।”

अगला चरण: विधानसभा से पास होने के बाद अब इस बिल को राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में अधिसूचित (Notify) कर दिया जाएगा।

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