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मोदी-ट्रंप वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने पर बनी सहमति, शांति बहाली पर दिया जोर

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पैदा हुए गतिरोध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टेलीफोनिक बातचीत ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप प्रशासन के दोबारा सत्ता संभालने के बाद और ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली आधिकारिक चर्चा है।

मोदी-ट्रंप वार्ता: होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रखने पर बनी सहमति, शांति बहाली पर दिया जोर

मंगलवार को हुई इस बातचीत की जानकारी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने साझा की। यह संवाद ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर अमेरिकी हमलों को पांच दिनों के लिए टालने की घोषणा की गई है, लेकिन जमीन पर तनाव बरकरार है।

1. बातचीत के मुख्य बिंदु: ऊर्जा और सुरक्षा

दोनों नेताओं के बीच चर्चा का केंद्र ‘मिडिल ईस्ट’ की अस्थिरता और वैश्विक व्यापार मार्ग रहा:

* होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप इस बात पर सहमत हुए कि इस समुद्री मार्ग का खुला, सुरक्षित और सभी के लिए सुलभ रहना अनिवार्य है। भारत के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसके कई जहाज अभी भी वहां फंसे हुए हैं।

* शांति का समर्थन: पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्र में तनाव कम करने और जल्द से जल्द शांति बहाली के पक्ष में है।

* निरंतर संपर्क: दोनों नेताओं ने भविष्य में भी शांति और स्थिरता के प्रयासों के लिए लगातार संवाद बनाए रखने पर सहमति जताई।

2. ट्रंप का ‘रहस्यमयी’ ईरानी नेता और बातचीत का दावा

राष्ट्रपति ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है कि अमेरिका ईरान के एक “बेहद सम्मानित और समझदार” नेता के साथ सीधे संपर्क में है।

* कौन है वह नेता?: ट्रंप ने साफ किया कि यह नेता ईरान के सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई नहीं हैं।

* कयासों का बाजार: रिपोर्टों (Axios) के अनुसार, यह नेता ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ हो सकते हैं। वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच भी ‘सीधी बातचीत’ हुई है।

3. ईरान का रुख: दावों का खंडन

ईरानी संसद के अध्यक्ष गालिबाफ ने अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से साफ इनकार किया है।

* गालिबाफ का बयान: उन्होंने कहा कि बातचीत की खबरें केवल तेल बाजारों और वित्तीय बाजारों में हेरफेर करने के लिए फैलाई जा रही हैं।

* पलटवार: गालिबाफ ने दावा किया कि अमेरिका और इजरायल अब इस युद्ध की “दलदल” में फंस चुके हैं और बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं।

निष्कर्ष: भारत की भूमिका

इस बातचीत से स्पष्ट है कि पश्चिम एशिया के संकट में अमेरिका भारत को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ या रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। भारत की प्राथमिकता अपनी ऊर्जा सुरक्षा (LPG और तेल आयात) और खाड़ी देशों में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञ की राय: “होर्मुज स्ट्रेट पर मोदी और ट्रंप की एक राय होना संकेत देता है कि आने वाले दिनों में इस जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशन या कूटनीतिक समझौता देखा जा सकता है।”

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