उत्तरकाशी के फीताड़ी गांव में भीषण अग्निकांड: 8 लकड़ी के भवन जलकर राख, 3 मवेशियों की मौत
उत्तरकाशी जनपद के मोरी ब्लॉक से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ सुदूरवर्ती फीताड़ी गांव में भीषण अग्निकांड ने भारी तबाही मचाई है। लकड़ी के बने घरों और घनी बस्ती होने के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए हैं।
उत्तरकाशी के फीताड़ी गांव में भीषण अग्निकांड: 8 लकड़ी के भवन जलकर राख, 3 मवेशियों की मौत
सोमवार देर रात मोरी विकासखंड के दुर्गम क्षेत्र फीताड़ी में अचानक लगी आग ने पूरे गांव में अफरा-तफरी मचा दी। लकड़ी के पारंपरिक ऊंचे भवनों के कारण आग इतनी तेजी से फैली कि ग्रामीणों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
1. घटना का विवरण: सात घंटे तक चला तांडव
* आग का समय: सोमवार रात को जब गांव के लोग जागे हुए थे, तभी अचानक एक घर से आग की लपटें उठीं।
* राहत कार्य: ग्राम प्रधान की सूचना पर अग्निशमन, पुलिस, राजस्व विभाग और SDRF की टीमें मौके के लिए रवाना हुईं। हालांकि, दूरी और नेटवर्क की समस्या के कारण समन्वय में भारी दिक्कतें आईं।
* कड़ी मशक्कत: ग्रामीणों और प्रशासन की टीम ने लगभग 7 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
2. नुकसान का आकलन: राख हुए आशियाने
आग इतनी भयानक थी कि घरों के भीतर रखा राशन, कपड़े, नकदी और कीमती सामान कुछ ही समय में जलकर खाक हो गया।
* भवन: कुल 8 लकड़ी के आवासीय भवन पूरी तरह नष्ट हो गए हैं।
* पशु हानि: इस अग्निकांड में 3 गायों की जिंदा जलने से मौत हो गई है।
* जनहानि: गनीमत रही कि घटना के समय ग्रामीण सोए नहीं थे, जिससे किसी इंसान की जान नहीं गई।
3. प्रभावित परिवारों की सूची
इस त्रासदी में प्रेम सिंह, कुन्दन सिंह, रविन्द्र सिंह, उमशल सिंह, तिलक सिंह, नोनियाल सिंह, ताजम देई, दुदकली देवी, विरेन्दर सिंह, सुविन्द्र, मोहन सिंह, जनक सिंह और सिलदार सिंह जैसे कई ग्रामीणों के मकानों को भारी क्षति पहुँची है।
4. शासन-प्रशासन की कार्रवाई
कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने घटना का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी उत्तरकाशी को तत्काल मौके पर पहुँचने और प्रभावितों को सहायता देने के निर्देश दिए हैं।
* तत्काल राहत: आपदा प्रबंधन सचिव से वार्ता कर प्रभावित परिवारों को राशन, टेंट और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
* जांच: आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसांई के अनुसार, आग लगने के सही कारणों का पता टीम के वापस लौटने के बाद ही चल पाएगा।
5. मोरी ब्लॉक में बार-बार लग रही आग
यह पहली बार नहीं है जब मोरी ब्लॉक के गांवों में ऐसी घटना हुई है। इससे पहले डामटी थुनारा में तीन मंजिला भवन जल गया था और सट्टा गांव में एक बुजुर्ग की मौत भी हो चुकी है। लकड़ी के बने पुराने घर और संसाधनों की कमी यहाँ बार-बार बड़े अग्निकांडों का कारण बन रहे हैं।
चुनौती: फीताड़ी जैसे दूरस्थ गांवों में मोबाइल नेटवर्क न होना और सड़कों की खराब स्थिति राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
