क्या है मोबाइल रिचार्ज का ‘डेटा गेम’?
मोबाइल रिचार्ज को लेकर चल रहा यह ‘बवाल’ असल में डेटा की बर्बादी और उपभोक्ताओं के अधिकारों से जुड़ा है। इसकी शुरुआत तब हुई जब सोमवार (23 मार्च 2026) को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में टेलीकॉम कंपनियों की ‘डेली डेटा लिमिट’ (Daily Data Limit) पॉलिसी पर सवाल उठाए।
यहाँ इस पूरे विवाद और रिचार्ज के पीछे के उस ‘गेम’ को आसान भाषा में समझाया गया है:
क्या है मोबाइल रिचार्ज का ‘डेटा गेम’?
आजकल अधिकांश टेलीकॉम कंपनियां (जैसे Jio, Airtel, Vi) आपको ऐसे प्लान बेचती हैं जिनमें हर दिन 1.5GB, 2GB या 3GB डेटा मिलता है। असली खेल यहाँ शुरू होता है:
* “आधी रात का काल”: मान लीजिए आपने 2GB डेटा के लिए पैसे दिए। पूरे दिन में आपने सिर्फ 1.5GB इस्तेमाल किया। बचा हुआ 0.5GB डेटा रात 12 बजते ही ‘गायब’ हो जाता है।
* कोई रोलओवर नहीं: टेलीकॉम कंपनियों की पॉलिसी है कि अगर आपने डेटा इस्तेमाल नहीं किया, तो वह अगले दिन के लिए नहीं बचेगा। इसे ‘Use it or Lose it’ (इस्तेमाल करो या गंवा दो) पॉलिसी कहते हैं।
* दोहरी मार: उपभोक्ता उस पूरे डेटा के लिए पहले ही पैसे दे चुका है, फिर भी वह डेटा उसका नहीं रहता। कंपनियों को इससे यह फायदा होता है कि उन्हें नेटवर्क पर कम लोड झेलना पड़ता है और ग्राहक बार-बार रिचार्ज करता है।
राघव चड्ढा ने संसद में क्यों उठाया यह मुद्दा?
सांसद राघव चड्ढा ने इस पॉलिसी को ‘अनुचित’ बताते हुए 3 प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनसे यह बवाल और बढ़ गया है:
* डेटा रोलओवर (Data Rollover): मांग है कि दिन के अंत में बचा हुआ डेटा अगले दिन की लिमिट में जोड़ा जाए। जब तक रिचार्ज की वैलिडिटी (जैसे 28 या 84 दिन) खत्म न हो, डेटा लैप्स नहीं होना चाहिए।
* पैसे की वापसी या एडजस्टमेंट: यदि कोई यूजर लगातार कम डेटा इस्तेमाल करता है, तो बचे हुए डेटा की वैल्यू को अगले रिचार्ज के पैसों में कम (Discount) किया जाना चाहिए।
* डेटा ट्रांसफर: डेटा को यूजर की ‘डिजिटल प्रॉपर्टी’ माना जाए। जैसे हम यूपीआई (UPI) से पैसे भेजते हैं, वैसे ही बचा हुआ डेटा दोस्तों या रिश्तेदारों को ट्रांसफर करने की सुविधा मिले।
28 दिन बनाम 1 महीने का विवाद
इससे पहले भी रिचार्ज साइकिल को लेकर विवाद रहा है। कंपनियां 1 महीने के बजाय 28 दिन का प्लान देती हैं। इसका मतलब है कि आपको साल में 12 नहीं, बल्कि 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है। यह 1 महीने का अतिरिक्त रिचार्ज कंपनियों के लिए अरबों रुपये का मुनाफा पैदा करता है।
निष्कर्ष
सांसद का कहना है कि “गायब होने वाले डेटा पर डिजिटल इंडिया नहीं बन सकता।” जिस चीज के लिए ग्राहक ने भुगतान कर दिया है, उसे जब्त करना व्यापारिक अनैतिकता है।
