भू-कानून की लड़ाई अब आर-पार की: UKD ने किया ‘मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ’ का गठन, लूशुन टोडरिया संभालेंगे कमान
उत्तराखंड की राजनीति में ‘मूल निवास’ और ‘सशक्त भू-कानून’ के मुद्दे ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने इस लड़ाई को अब एक नए और संगठित स्तर पर ले जाने का फैसला किया है।
भू-कानून की लड़ाई अब आर-पार की: UKD ने किया ‘मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ’ का गठन, लूशुन टोडरिया संभालेंगे कमान
देहरादून: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने राज्य के सबसे संवेदनशील मुद्दे—’मूल निवास और भू-कानून’—पर अपना रुख और अधिक आक्रामक कर दिया है। यूकेडी के केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने इस आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने के लिए एक विशेष ‘मूल निवास भू-कानून प्रकोष्ठ’ के गठन की घोषणा की है।
प्रमुख नियुक्तियां और रणनीतिक बदलाव
* लूशुन टोडरिया को बड़ी जिम्मेदारी: आंदोलन के प्रमुख चेहरे लूशुन टोडरिया को इस नए प्रकोष्ठ का केंद्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। टोडरिया लंबे समय से जमीन बचाने की इस लड़ाई में सक्रिय रहे हैं।
* राजनीतिक मोड़: नवनियुक्त अध्यक्ष टोडरिया ने स्पष्ट किया कि अब यह लड़ाई केवल सड़कों पर नहीं, बल्कि विशुद्ध रूप से राजनीतिक तरीके से लड़ी जाएगी।
* भाजपा को घेरने की तैयारी: टोडरिया का मानना है कि चुनाव के समय ‘गैर-राजनीतिक आंदोलन’ करने से सीधा फायदा सत्ताधारी दल (भाजपा) को होता है, इसलिए अब इस मुद्दे को यूकेडी के झंडे के नीचे राजनीतिक ताकत के रूप में लड़ा जाना जरूरी है।
यूकेडी का रुख: “हमारी जमीन, हमारा अधिकार”
पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुनील कोटनाला ने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल राज्य आंदोलन के समय से ही जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है।
* संवेदनशीलता: अलग प्रकोष्ठ का गठन यह दर्शाता है कि यूकेडी इस मुद्दे को केवल चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के अस्तित्व का सवाल मानती है।
* जनसंपर्क अभियान: जल्द ही प्रकोष्ठ की कार्यकारिणी का विस्तार कर पूरे प्रदेश में आम जनता को लामबंद (Mobilize) करने के लिए बड़े अभियान शुरू किए जाएंगे।
क्यों अहम है यह मुद्दा?
उत्तराखंड में लंबे समय से ‘सशक्त भू-कानून’ (हिमाचल की तर्ज पर) और ‘मूल निवास 1950’ की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि:
* बाहरी लोगों द्वारा जमीन खरीदने की खुली छूट से राज्य की जनसांख्यिकी (Demography) बदल रही है।
* मूल निवासियों के अधिकारों और संसाधनों पर संकट मंडरा रहा है।
निष्कर्ष और आगामी कदम
विधानसभा चुनावों की तैयारियों में जुटी यूकेडी ने इस मास्टरस्ट्रोक के जरिए खुद को क्षेत्रीय पहचान के सबसे बड़े रक्षक के रूप में पेश किया है। अब देखना यह होगा कि अन्य पार्टियां इस ‘प्रकोष्ठ’ के गठन और टोडरिया की नियुक्ति पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।
