Friday, June 19, 2026
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मुरादाबाद में आतंकी दस्तक: एटीएस के रडार पर ‘डिजिटल स्लीपर सेल’ और शिक्षित युवा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और आस-पास के इलाकों में पिछले कुछ समय से आतंकी नेटवर्क की सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में यूपी एटीएस (ATS) द्वारा की गई गिरफ्तारियों ने यह साफ कर दिया है कि आतंकी संगठन अब डिजिटल माध्यमों और शिक्षित युवाओं के जरिए अपना जाल फैला रहे हैं।

मुरादाबाद में आतंकी दस्तक: एटीएस के रडार पर ‘डिजिटल स्लीपर सेल’ और शिक्षित युवा

1. ताजा घटनाक्रम: डेंटल छात्र की गिरफ्तारी (मार्च 2026)

मार्च 2026 के मध्य में यूपी एटीएस ने मुरादाबाद से हारिश अली नामक एक युवक को गिरफ्तार किया।

* पहचान: हारिश सहारनपुर का रहने वाला है और मुरादाबाद के एक कॉलेज में BDS (डेंटल सर्जरी) द्वितीय वर्ष का छात्र है।

* आरोप: वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के ऑनलाइन मॉड्यूल से जुड़ा था और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने (Radicalization) का काम कर रहा था।

2. मुरादाबाद क्यों बन रहा है केंद्र?

सुरक्षा एजेंसियों के विश्लेषण के अनुसार, मुरादाबाद के इलाकों से तार जुड़ने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

* सॉफ्ट टारगेट: आतंकी संगठन अब अनपढ़ लोगों के बजाय कॉलेजों में पढ़ने वाले शिक्षित युवाओं को निशाना बना रहे हैं, ताकि वे तकनीकी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का बेहतर इस्तेमाल कर सकें।

* डिजिटल भर्ती: हारिश अली जैसे आरोपी इंस्टाग्राम, Discord और Session जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स का उपयोग कर रहे थे ताकि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके।

* लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी: मुरादाबाद की भौगोलिक स्थिति और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य संवेदनशील जिलों (जैसे सहारनपुर, संभल) से इसकी निकटता इसे छिपने और नेटवर्क विस्तार के लिए मुफीद बनाती है।

3. ‘अल-इत्तेहाद मीडिया फाउंडेशन’ का खुलासा

जांच में सामने आया है कि हारिश अली ने “अल-इत्तेहाद मीडिया फाउंडेशन” नाम से एक ग्रुप बनाया था। इसका उद्देश्य था:

* भारत में ISIS के प्रोपेगेंडा को फैलाना।

* लोकतांत्रिक सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए युवाओं को उकसाना।

* पाकिस्तान और अन्य देशों में बैठे आकाओं के निर्देश पर भारत में ‘फिदायीन’ हमलों के लिए स्लीपर सेल तैयार करना।

4. पिछले लिंक और हिजबुल कनेक्शन

मुरादाबाद का नाम पहले भी आतंकी गतिविधियों में आता रहा है। 2023-24 के दौरान भी यहाँ से हिजबुल मुजाहिदीन और अन्य मॉड्यूल के संदिग्धों को पकड़ा गया था। एजेंसियां अब इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या पुराने स्लीपर सेल ही नए नाम और नई तकनीक के साथ फिर से सक्रिय हो रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई: एक नज़र में

| बिंदु | विवरण |

| मुख्य आरोपी | हारिश अली (BDS छात्र) |

| संगठन | ISIS (ऑनलाइन मॉड्यूल) |

| प्लेटफॉर्म | Instagram, Discord, VPN का उपयोग |

| उद्देश्य | कट्टरपंथ फैलाना और नई भर्ती करना |

| एजेंसी | यूपी एटीएस Anti-Terrorism Squad|

निष्कर्ष: मुरादाबाद में आतंकी नेटवर्क का जुड़ना किसी स्थानीय समस्या से ज्यादा एक ‘डिजिटल जिहाद’ का हिस्सा है। यूपी एटीएस अब मुरादाबाद के अन्य शिक्षण संस्थानों और हॉस्टलों में भी संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है।

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