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सेमरिया विधायक अभय मिश्रा की कुर्सी पर संकट: हाईकोर्ट में चलेगा ‘इलेक्शन ट्रायल’

मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने के उनके आवेदन को ठुकरा दिया है, जिसका अर्थ है कि अब उनकी विधायकी पर ‘ट्रायल’ (मुकदमा) चलेगा।

सेमरिया विधायक अभय मिश्रा की कुर्सी पर संकट: हाईकोर्ट में चलेगा ‘इलेक्शन ट्रायल’

1. क्या है मामला? (चुनाव परिणाम 2023)

2023 के विधानसभा चुनाव में अभय मिश्रा ने भाजपा उम्मीदवार कृष्णपति त्रिपाठी को मात्र 637 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया था।

* अभय मिश्रा (कांग्रेस): 56,024 वोट

* कृष्णपति त्रिपाठी (भाजपा): 55,387 वोट

इस जीत के बाद भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव प्रक्रिया और विधायक के हलफनामे में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

2. विधायक पर लगे गंभीर आरोप

याचिका में विधायक अभय मिश्रा पर मुख्य रूप से तथ्यों को छिपाने और भ्रष्ट आचरण के आरोप लगाए गए हैं:

* आपराधिक रिकॉर्ड छिपाना: आरोप है कि नामांकन के समय शपथ पत्र (फॉर्म-26) में उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज 9 आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं दी और वहां “नॉट एप्लीकेबल” (N.A.) लिख दिया।

* बैंक लोन की जानकारी: याचिका के अनुसार, उन्होंने ICICI बैंक से लिए गए लगभग 23 लाख रुपये के लोन (जो ब्याज सहित 50 लाख से अधिक था) का विवरण हलफनामे में नहीं दिया।

* आय के स्रोत की अस्पष्टता: विधायक ने अपनी आय का साधन “प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से वेतन” बताया, लेकिन कंपनी का नाम और विवरण गुप्त रखा।

* सरकारी अनुबंध (Contract): आरोप है कि उनका लोक निर्माण विभाग (PWD) और रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन जैसे सरकारी विभागों के साथ अनुबंध रहा है, जो चुनावी पात्रता के विरुद्ध है।

3. हाईकोर्ट का कड़ा रुख

जस्टिस विनय सराफ की एकलपीठ ने विधायक अभय मिश्रा की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने इस केस को शुरुआत में ही खत्म करने की मांग की थी। कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां:

* गंभीर आरोप: कोर्ट ने माना कि आपराधिक जानकारी छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है और इसकी विस्तृत जांच जरूरी है।

* ट्रायल की आवश्यकता: बैंक लोन और आय के स्रोतों से जुड़े दावों की सच्चाई केवल ट्रायल के दौरान ही स्पष्ट हो सकती है।

* आदेश: अदालत ने विधायक को चार सप्ताह के भीतर अपना लिखित जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

4. आगे क्या होगा?

अब यह मामला ‘ऑर्डर 7 रूल 11 CPC’ के दायरे से बाहर निकलकर नियमित ट्रायल में जाएगा। यदि ट्रायल के दौरान याचिकाकर्ता के आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो अभय मिश्रा का निर्वाचन शून्य (निरस्त) घोषित किया जा सकता है, जिससे उनकी विधानसभा सदस्यता जा सकती है।

मामले का संक्षिप्त विवरण

| विवरण | जानकारी |

| विधानसभा क्षेत्र | सेमरिया (रीवा, म.प्र.) |

| पक्षकार | अभय मिश्रा (कांग्रेस) बनाम कृष्णपति त्रिपाठी (भाजपा) |

| जीत का अंतर | 637 वोट |

| मुख्य विवाद | हलफनामे (Affidavit) में जानकारी छिपाना |

| अगला कदम | 4 सप्ताह में लिखित जवाब और साक्ष्यों की जांच |

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