उत्तराखंड

उत्तराखंड में 2 लाख ‘संदेहास्पद’ मतदाता: निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई

उत्तराखंड में मतदाता सूची के शुद्धिकरण को लेकर निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से पहले की गई प्री-SIR प्रक्रिया में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

उत्तराखंड में 2 लाख ‘संदेहास्पद’ मतदाता: निर्वाचन आयोग की बड़ी कार्रवाई

1. क्या है पूरा मामला?

राज्य में मतदाता सूचियों की जांच के दौरान लगभग 2 लाख ऐसे नाम सामने आए हैं, जो एक से अधिक स्थानों पर दर्ज हैं। निर्वाचन आयोग को अंदेशा है कि ये दोहरी वोटर आईडी (Dual Voter ID) के मामले हो सकते हैं। इन मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम समान पाए गए हैं, जिससे उनकी पहचान संदिग्ध हो गई है।

2. मुख्य निर्वाचन अधिकारी का रुख

मुख्य निर्वाचन अधिकारी बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम के अनुसार:

* संदिग्ध मतदाताओं को नोटिस जारी कर उनसे स्थिति स्पष्ट करने को कहा जाएगा।

* जांच के बाद जहां भी ‘डुप्लीकेसी’ (दोहराव) पाई जाएगी, वहां एक स्थान से मतदाता का नाम काट दिया जाएगा।

* सबसे ज्यादा संदिग्ध मामले देहरादून जिले से सामने आए हैं, हालांकि पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में ऐसी शिकायतें हैं।

3. राजनीतिक प्रतिक्रिया और आरोप-प्रत्यारोप

इस मुद्दे पर राज्य की सियासत भी गरमा गई है:

* कांग्रेस: पार्टी नेता अमरेंद्र बिष्ट का आरोप है कि यह एक राजनीतिक षड्यंत्र है। चुनाव को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर दोहरी आईडी बनाई जाती हैं। उन्होंने आयोग से तत्काल नाम काटने की मांग की है।

* भाजपा: कैबिनेट मंत्री खजान दास ने आयोग की कार्यप्रणाली पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि प्री-SIR के दौरान आयोग बेहतर काम कर रहा है और जल्द ही स्थिति साफ हो जाएगी।

4. कानूनी पेच और पिछला घटनाक्रम

यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में दोहरी वोटर आईडी का मुद्दा उठा हो:

* पंचायत चुनाव: पिछले पंचायत चुनावों में भी यह मामला उछला था, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए दो जगह नाम रखने वाले प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने से रोकने के आदेश दिए थे।

* विचाराधीन मामले: वर्तमान में लगभग 800 से 1000 मामले डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट तक में लंबित हैं। समाजसेवी शक्ति सिंह का कहना है कि इससे चुनाव के परिणाम प्रभावित होते हैं, इसलिए इस पर गंभीरता जरूरी है।

निष्कर्ष

निर्वाचन आयोग की इस सक्रियता का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले एक ‘पारदर्शी और त्रुटिहीन’ मतदाता सूची तैयार करना है। 2 लाख नोटिस जारी होने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इसमें कितने मामले तकनीकी गलती के हैं और कितने जानबूझकर बनाई गई फर्जी आईडी के।

 

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