राजनीति

‘होली-दिवाली जानता हूं, ईद-रमजान नहीं’: BJP सांसद के विवादित बयान पर सपा का हमला

‘होली-दिवाली जानता हूं, ईद-रमजान नहीं’: BJP सांसद के विवादित बयान पर सपा का हमला

अलीगढ़ से भाजपा सांसद सतीश गौतम के एक हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। गौतम ने कहा कि वे होली और दिवाली जैसे त्योहारों को जानते हैं, लेकिन ईद और रमजान के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। यह बयान एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया गया, जहां वे काली गाड़ियों में सवार बदमाशों और अपराधियों पर बोल रहे थे। उनके इस कथन को विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने सांप्रदायिक और भेदभावपूर्ण बताते हुए कड़ी आलोचना की है।

बयान का पूरा संदर्भ: सांसद गौतम ने कार्यक्रम में कहा, “मैं होली-दिवाली जानता हूं, ईद-रमजान नहीं।” उन्होंने आगे जोड़ा कि काली गाड़ियों में घूमने वाले बदमाश अपराध करते हैं और ऐसे लोगों को सबक सिखाने की जरूरत है। हालांकि, उनका मुख्य फोकस अपराध पर था, लेकिन त्योहारों का जिक्र करते हुए यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई लोगों ने इसे मुस्लिम समुदाय के त्योहारों का अपमान माना, जबकि भाजपा ने इसे सामान्य टिप्पणी बताकर बचाव किया।

समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया: सपा ने इस बयान को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “भाजपा के नेता त्योहारों को भी सांप्रदायिक रंग देने से बाज नहीं आते। होली-दिवाली सबके हैं, ईद-रमजान भी। यह बयान देश की एकता पर हमला है।” सपा के अन्य नेताओं जैसे जियाउर्रहमान बर्क और अन्य ने भी कड़ी निंदा की, इसे चुनावी फायदे के लिए इस्तेमाल होने वाली रणनीति बताया। पार्टी ने मांग की कि सांसद अपने बयान पर माफी मांगें और भाजपा उन्हें पार्टी से निष्कासित करे।

भाजपा का बचाव: भाजपा ने बयान को गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि सांसद का इरादा अपराधियों पर निशाना साधना था, न कि किसी समुदाय को अपमानित करना। “यह विपक्ष की सस्ती राजनीति है, जो हर बात को सांप्रदायिक रंग देती है,” उन्होंने कहा। अलीगढ़ में भाजपा कार्यकर्ताओं ने सांसद के समर्थन में रैली भी निकाली।

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब होली का त्योहार बीत चुका है और रमजान चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान चुनावी मौसम में ध्रुवीकरण बढ़ा सकते हैं, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां सांप्रदायिक मुद्दे संवेदनशील हैं।

क्या यह बयान राजनीतिक बहस को नई दिशा देगा या सिर्फ एक क्षणिक विवाद बनकर रह जाएगा? फिलहाल, सपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश की है, जबकि भाजपा इसे नजरअंदाज करने की रणनीति पर चल रही है।

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