उत्तराखंड

उत्तराखंड 2027 का चुनावी शंखनाद: धारचूला से आए नेताओं ने थामा भाजपा का हाथ; हर विधानसभा में 3000 नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य

उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। चुनावों में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने ‘कुनबा बढ़ाओ’ अभियान के जरिए अपनी जमीन मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पिथौरागढ़ के धारचूला से बड़ी संख्या में स्थानीय नेताओं ने भाजपा का दामन थामा है।

उत्तराखंड 2027 का चुनावी शंखनाद: धारचूला से आए नेताओं ने थामा भाजपा का हाथ; हर विधानसभा में 3000 नए सदस्य जोड़ने का लक्ष्य

देहरादून: उत्तराखंड में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (2027) को लेकर सियासी पारा चढ़ने लगा है। चुनाव से ठीक एक साल पहले का समय राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि यही वह समय होता है जब पार्टियां अपनी ताकत बढ़ाने और दूसरे दलों के किलों में सेंधमारी करने का काम करती हैं। इसी क्रम में शनिवार को राजधानी देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में एक बड़े ‘मिलन समारोह’ का आयोजन किया गया।

धारचूला में भाजपा की बड़ी सेंधमारी

पिथौरागढ़ जिले के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण धारचूला क्षेत्र से आए तमाम दिग्गज स्थानीय नेताओं ने अपनी पुरानी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

* मुख्य चेहरे: भाजपा में शामिल होने वालों में धारचूला नगर पालिका के अध्यक्ष समेत कई प्रमुख नेता और सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हैं।

* स्वागत: प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने सभी नए सदस्यों का फूल-माला पहनाकर स्वागत किया और कहा कि उनके आने से सीमांत क्षेत्र में पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी।

हर बूथ पर ‘सेंधमारी’ की रणनीति

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट ने आगामी चुनावों के लिए पार्टी का मास्टर प्लान साझा करते हुए कहा:

* लक्ष्य: प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा सीट पर दो से तीन हजार नए कार्यकर्ताओं को भाजपा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

* रणनीति: पार्टी का ध्यान विशेष रूप से पोलिंग बूथ पर काम करने वाले दूसरे दलों के सक्रिय कार्यकर्ताओं पर है।

* डेडलाइन: भट्ट ने स्पष्ट किया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने तक भाजपा का सदस्यता अभियान और कुनबा बढ़ाओ कार्यक्रम आक्रामक रूप से जारी रहेगा।

2027 की तैयारी: ‘स्लो एंड स्टेडी’

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि वर्तमान में दलबदल की प्रक्रिया भले ही धीमी दिख रही हो, लेकिन जैसे-जैसे चुनावी वर्ष की छमाही नजदीक आएगी, ‘कुनबा बढ़ाने’ और दूसरे दलों में ‘सेंधमारी’ का दौर और तेज होगा। भाजपा इस बार बूथ स्तर पर माइक्रो-मैनेजमेंट कर रही है ताकि 2027 में प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की जा सके।

महेन्द्र भट्ट (प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा): “चुनावी माहौल बन रहा है और रोजाना बड़ी संख्या में लोग पीएम मोदी की नीतियों से प्रभावित होकर हमसे जुड़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य पोलिंग बूथ स्तर पर विपक्षी दलों के आधार को हिलाना है।”

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