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लोकसभा: अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद पहली बार सदन पहुंचे स्पीकर ओम बिरला, सदन को किया संबोधित—जाने क्या-क्या कहा!

लोकसभा: अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद पहली बार सदन पहुंचे स्पीकर ओम बिरला, सदन को किया संबोधित—जाने क्या-क्या कहा!

नई दिल्ली से बड़ी अपडेट! लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार (11 मार्च 2026) को ध्वनिमत से खारिज हो गया। यह प्रस्ताव फरवरी 2026 में 118 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ पेश किया गया था, जिसमें स्पीकर पर पक्षपात, विपक्ष की आवाज दबाने और माइक कट करने जैसे आरोप लगाए गए थे। लगभग 4 दशक बाद ऐसा प्रस्ताव आया था, और इस पर 12 घंटे से ज्यादा की तीखी बहस हुई।

अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद गुरुवार (12 मार्च 2026) को स्पीकर ओम बिरला पहली बार सदन में लौटे और आसन संभालते हुए सदन को संबोधित किया। यह उनका पहला संबोधन था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों का जवाब दिया और निष्पक्षता पर जोर दिया। सदन में हंगामा जारी था, लेकिन स्पीकर ने शांतिपूर्ण तरीके से बात रखी।

स्पीकर ओम बिरला ने सदन में क्या-क्या कहा? (मुख्य पॉइंट्स)

निष्पक्षता पर जोर: “मैंने हमेशा सदन की कार्यवाही को निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के अनुसार चलाने की कोशिश की है। मैंने सदन में हर सदस्य को बोलने का मौका देने का प्रयास किया है।”

कोई विशेषाधिकार नहीं: “कुछ माननीय सदस्यों ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष (LoP) को बोलने से रोका जा रहा है या पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा। चाहे सदन के नेता हों, नेता प्रतिपक्ष हों, मंत्री हों या कोई अन्य सदस्य—हर माननीय सदस्य को सदन के नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही बोलने का अधिकार है। कोई भी सदस्य सदन से ऊपर नहीं है।”

माइक कंट्रोल का खंडन: “आसन (Chair) के पास माइक ऑन/ऑफ करने का कोई बटन नहीं होता। जिसे बोलने की इजाजत होती है, उसी का माइक ऑन होता है। माइक कट करने के आरोप बेबुनियाद हैं।”

निलंबन पर सफाई: “मैं सांसदों को निलंबित नहीं करना चाहता था, लेकिन नियमों के तहत फैसले लेने पड़ते हैं। सभी को सोचना होगा कि निलंबन के फैसले क्यों लिए गए।”

सदन की गरिमा: “सदन भारत के 140 करोड़ नागरिकों की संप्रभु इच्छा का प्रतिनिधित्व करता है। मैंने सदन की गरिमा और शांतिपूर्ण कार्यवाही बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाई है।”

धन्यवाद: स्पीकर ने दोनों पक्षों (समर्थन और आलोचना करने वाले) को धन्यवाद दिया और कहा कि 12 घंटे की बहस से सदस्यों की चिंताएं सामने आईं।

क्या हुआ था प्रस्ताव पर?

विपक्ष का आरोप: स्पीकर ने राहुल गांधी (LoP) को बोलने नहीं दिया, विपक्ष को दबाया, पक्षपात किया।

सत्ता पक्ष का जवाब: गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि स्पीकर पूरे सदन के हैं, अविश्वास प्रस्ताव अफसोसजनक है। विपक्ष की शिकायतें गलत हैं।

परिणाम: ध्वनिमत से प्रस्ताव गिरा—कोई वोटिंग नहीं हुई, क्योंकि स्पष्ट बहुमत सत्ता पक्ष के साथ था।

यह घटना संसद में स्पीकर की भूमिका और निष्पक्षता पर बड़ी बहस का कारण बनी। स्पीकर ओम बिरला ने संबोधन से साफ किया कि वे नियमों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। सदन की कार्यवाही बाद में हंगामे के कारण स्थगित कर दी गई।

क्या लगता है—स्पीकर का संबोधन संतुलित था या विपक्ष के आरोप सही थे? कमेंट में बताएं!

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