उत्तराखंड

गैरसैंण विधानसभा को ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ बनाने के सुझाव पर घमासान: सतपाल महाराज के बयान पर कांग्रेस हमलावर

गैरसैंण विधानसभा को ‘वेडिंग डेस्टिनेशन’ बनाने के सुझाव पर घमासान: सतपाल महाराज के बयान पर कांग्रेस हमलावर

देहरादून: उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज द्वारा भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित विधानसभा भवन को ‘वेडिंग और कॉर्पोरेट डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित करने के बयान ने राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। कांग्रेस ने इसे उत्तराखंड की अस्मिता और जनभावनाओं का अपमान बताते हुए सरकार को घेरा है।

मुख्य विवाद: क्या है सतपाल महाराज का बयान?

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने सुझाव दिया है कि भराड़ीसैंण विधानसभा भवन का उपयोग केवल सत्र के लिए न होकर, भविष्य में पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों (जैसे शादियां और कॉर्पोरेट इवेंट्स) के लिए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे स्थानीय रोजगार के अवसर सृजन होंगे।

कांग्रेस का कड़ा ऐतराज: ‘लोकतंत्र के मंदिर’ का अपमान

विपक्ष ने इस बयान को गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के सपने देख रहे उत्तराखंडियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया है।

1. गणेश गोदियाल (प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस) के आरोप

* सदन की गरिमा का उल्लंघन: गोदियाल ने कहा कि जब विधानसभा सत्र चल रहा हो, तो नीतिगत बयान सदन के भीतर दिए जाने चाहिए, न कि बाहर। उन्होंने इसे संसदीय परंपराओं के विरुद्ध बताया।

* विचारधारा में बदलाव: गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा कि जब महाराज कांग्रेस में थे, तब वे राजधानी निर्माण के समर्थक थे, लेकिन भाजपा में जाते ही उनके विचार बदल गए हैं।

* सरकारी संपत्तियों की ‘नीलामी’ की साजिश: उन्होंने ‘सर जॉर्ज एवरेस्ट’ संपत्ति का उदाहरण देते हुए आशंका जताई कि सरकार गुपचुप तरीके से गैरसैंण को किसी निजी संस्था को सौंपने की साजिश रच रही है।

2. यशपाल आर्या (नेता प्रतिपक्ष) की तीखी प्रतिक्रिया

यशपाल आर्या ने इस सुझाव को ‘अत्यंत निंदनीय’ करार दिया है। उनके अनुसार:

“गैरसैंण केवल एक भवन नहीं, बल्कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और भावनाओं का प्रतीक है। लोकतंत्र के मंदिर को शादी-बारात के लिए उपयोग करने की बात करना राज्य की अस्मिता का अपमान है।”

मुख्यमंत्री धामी से स्पष्टीकरण की मांग

कांग्रेस ने अब इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जवाब मांगा है। विपक्ष का कहना है कि:

* क्या यह महाराज का निजी बयान है या सरकार की कोई नई गुप्त नीति?

* सत्ता पक्ष और विपक्ष के सभी विधायकों को एक सुर में मुख्यमंत्री से इस पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग करनी चाहिए।

निष्कर्ष

गैरसैंण उत्तराखंड की भावनाओं का केंद्र रहा है। ऐसे में विधानसभा भवन को व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रस्ताव एक बड़े विवाद का रूप ले चुका है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस बयान से किनारा करती है या इसे नई पर्यटन नीति के रूप में पेश करती है।

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